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अपनी ही निगाहों में गुनहगार हो गई हूँ
अपनी ही निगाहों में गुनहगार हो गई हूँ हर सजा की मैं हक़दार हो गई हूँ तमाम उम्र नहीं देखूंगी ख़ुद को आईने में ऐ ख़ुदा! मैं इतनी दागदार हो गई
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जादू सच नही होता
कविता -कागज और नोट बचपन में पढ़ने का या अच्छा कुछ करने का मन कहां? और कब? होता है। पर मां समझाती थी एक ही बात बताती थी पढने से कुछ करन�
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अच्छे साथी के सपने
एक लड़की बचपन से ही अच्छा साथी मिलने की तमन्ना रखती है या अच्छे साथी के सपने सजाती है। जब लड़की बड़ी हो जाती है तो उस लड़की की शादी की �
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भक्ति करें तब शक्ति हो
मूरत में ही प्रभु मिले, रखें विश्वास साथ। श्रद्धा पावन को रखें,मिले आशीष हाथ। मूरत चमके दिव्य सा, बाहर आती जोत_ भक्त जनों को हो खुशी, प्�
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प्रेम भाव के फूल
मीरा की प्रभु प्रीत पर, दुनिया को है नाज। महल छोड़ बन साधवी,पहनी सेवा ताज। नाम जपे जग आज तक,अमर रहे यह भक्त_ मीरा जैसी भक्त बन,जीवन का रख �
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प्रेम प्रीत से है जहां
प्रेम प्रीत से है जहां, प्रेम प्रीत है साज। स्वर्ग लगे तब यह धरा, खुशियों में हो आज।। प्रेम प्रीत बिन शून्य जग, रहे उदासी राज। उलझन का �
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राजनीति की रोटियां
राजनीति की रोटियां, पकते हैं अब रोज। चोर_चोर सब एक हैं, करते रहते भोज।। राजनीति की रोटियां,नेता लोग के काम। बिना आधार के चले, रहे बदना�
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ज़िंदगी-खुशियों के सागर में तैरो ज़िंदगी
रंग बदलती पल _पल खूब है ज़िंदगी, फिर भी बहुत ही हर्ष देती है ज़िंदगी। चाहत दिल में सैकड़ों जवां हुए हैं, खुदा जरा साथ दें दगा ने दें ज़ि
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मंजिल को तो है ही पाना
बहुत से लोगों ने उठाया मेरी कमजोरी का फायदा अब उसी कमजोरी का बना के हथियार राह में निकल पड़ी हुं मंजिल को तो है ही पाना पर जिसने भी सता�
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सबसे बड़ी बेवकूफी है
अगर हमें किसी से चाहत है मगर उसे हमारी कदर तक नहीं तो उसके पीछे लगना या चाहत दिखाना हमारी सबसे बड़ी बेवकूफी है
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जिंदगी एक पत्थर जैसी बन गई है
ऐसे बैठे हैं जैसे बेकार है कुछ ना काम है ना कोई पहचान है बैठे-बैठे ना दिन कटता है सोए सोए भी तो इंसान कितना सोता है जिंदगी एक पत्थर जैस�
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जिंदगी बन गई है एक तमाशा
जिंदगी बन गई है एक तमाशा तमाशा बनाने वालों को जी भर के आ रहा है मजा ना समझ पाए इस दुनिया में कोई भी ना होता है अपना हर कोई उठाता है मजबूर
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