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प्रेरक कहानी बुढ़िया की सुई
■◆●■◆●■◆●■◆●■◆●■◆●■◆●◆◆●■ *🌳🦚प्रेरक कहानी🦚🌳* *💐💐बुढ़िया की सुई💐💐* #सपनों का सौदागर...... करण सिंह# ★■◆★■◆★■◆★■◆★■◆★■◆★■◆★ 🎊एक बा�
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इन मयकदों काअबकी सारा हिसाब कर दे
इन मयकदों काअबकी सारा हिसाब कर दे मेरे लहू की बूंदों को ही शराब कर दे। जालिम न चल कमर को अपनी दिखादिखा के ऐसा न हो ये मेरी नीयत खराब कर �
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पूर्णमासी का चांद - भाग- 01
पूर्णमासी का चांद( A2 ) _____ पूर्णमासी का चांद आज देर से निकल रहा था क्योंकि आकाश में काली घटा बिखरे हुए थे , दो दिल आपस में मिलने के लिए लाल�
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निगाहों में
निगाहों में हमने तुमको बसाया और कोई हमें राज न आया तुम्हें क्या बताएं कितनी मोहब्बत करते हैं तुमसे वैसा किसी पे न मुझको आया। धन्�
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तकलीफ
मुझे तकलीफ होती थी तो दर्द उसे होता था मेरे आंख से आंसू बहते थें तो दिल उसका रोता था पर वक़्त के साथ सब बदल गया मौसम बदल गया वो भी बदल �
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कोई तो याद मेरी कहानी रखे
कोई तो याद मेरी कहानी रखे बेवजह अपनी आंखों मे पानी रखे। रब्त है जब उसे हर नई चीज से सांस क्यों फिर बदन में पुरानी रखे। क्यों न हो हादस
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आज फिर किसी से कोई बवाल कर बैठे
आज फिर किसी से कोई बवाल कर बैठे सर ए राह मोहब्बत का सवाल कर बैठे। कांच का बदन उसका कांच की कमर उसकी और कांच की तशरीफ है सँभाल कर बैठे। �
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मां सुनाती थी बचपन में एक कहानी
मां सुनाती थी बचपन में एक कहानी कहती थी सफेद घोड़ा पे सवार होकर आएगा तेरा भी राजकुमार पर कहानी तो कहानी होती है पूरी कहां होती है होत
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जिन हसीनो के यां नखरे उठाए जाते हैं
जिन हसीनो के यां नखरे उठाए जाते हैं उनकी आंख से खंजर भी चलाए जाते हैं। वागवान ए गुल के मुंह से सुना हमने हर निगाह में उनकी फूल पाए जात�
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स्थिति कुछ और ही होती
जब हम तुमसे मिलेंगे तो ऐसा कहेंगे जब हम तुमसे मिलेंगे तो वैसा कहेंगे यही सोचकर दिल परेशान हुआ था पर जब आप सामने आए तो जुबां से एक शब्द
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प्रकृति
ये आँधी,ये तूफान, ये भँवर बवंडर क्या हैं इनका पैगाम, कि मत कर इन बेबस प्रकृति से खिलवाड़, नहीं मानता रे मनुष्य! रहता इनको छेड़ता, फिर क्य
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प्रकृति
ये आँधी,ये तूफान, ये भँवर बवंडर क्या हैं इनका पैगाम, कि मत कर इन बेबस प्रकृति से खिलवाड़, नहीं मानता रे मनुष्य! रहता इनको छेड़ता, फिर क्य
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