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खुशियों भरा हर पल ना होगा गिर के ख़ुद को संभलना होगा ।। इस वक्त जो हे ये वक्त जी लो जो आज हे वो कल ना होगा ।। खुद पर खुदा पर भरोसा रखो क� read more >>
अधूरी है किताब जिंदगी बोहोत कुछ अभी तो खाली है पता नही मुकद्दर में ये क्या क्या लिखने वाली है।। हर रोज ही सफर में पत्थर देते हे ठोकरें read more >>
1.बचपन के वो दिन बहुत याद आतें हैं तपती धूप में, नंगे पांव दौडना घास पर चल,सर पतों से ओढ़ना शरीर का झुलसना, पांव का तपना तपते घाव read more >>
1.चिडिया रानी, चिड़िया रानी मुझ से क्यों शर्माती हो? जब भी तेरे पास आएं फुर्र से उड़ जाती हो 2.मैं भी हूं तन्हा-तन्हा तुभी अकेली लग� read more >>
निकले मंजिल की तलाश में मंजिल तो ना मिली हा मगर रास्तों पे बिछी कटो पे चलने का हुनर जान गए जखम तो बहुत मिला रास्तों मे मरहम तो नहीं read more >>
शमा खुद को अंधेरा मे भी रख कर सारे संसार को रौशन करती हैं read more >>
ऐ जिंदगी कभी फुरसत मे मिलना कुछ सवाल पुछनी है जवाब तो हमारे पास भी है मगर सही या गलत मालुम नही read more >>
माझी चुकी केलीय ना मी accept तरीही का मिळतेय मला त्याची punishment तु कोणाला हसताना पहा आणि असच हसत रहा जेव्हा हसताना पहाटे मी तुला खर तर विसरून ज read more >>
हे रंबा रंग तेरे=मुहब्बत बुलबुला सी दुःख पहाड़, जो कल-तक साथ था अचानक मुढ़ गया, दो- दिन की मुस्कुराहट, यह आँसू बेशुमार। ऊर्मि शर्मा। read more >>
एक बचपन ही तो था जो बचपने में गया थोड़ी मस्ती में गया तो थोड़ी खुद को समझने में गया जब हुए थोड़ा समझदार तो जिंदगी ने इम्तहान ले लिया कर� read more >>
कविता- वह मां थी! रचना- जितेन्द्र शर्मा तिथी- 01/01/2023 संदर्भ-प्रस्तुत पंक्तियां भारत संघ के कर्तव्य परायण और ऊर्जावान प्रधानमंत्री आदर� read more >>
लेख-कर्तव्य पथ पर आधुनिक राम! लेखक- जितेंद्र शर्मा तिथी- 30/12/2022 *** आज भारत संघ के सम्मानित प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी की मा read more >>
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