तर्ज़=>सरकी सर जो धीरे धीरे,मे पागल हुआ रे में धीरे धीरे
टेक=>ला ला ला ला
निकली जो घर से धीरे धीरे,छुप गया रे वो तो धीरे धीरे
ये गुजरिआ... � read more >>
कुछ काम करो, कुछ काम करो
जग में रह कर कुछ नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो, न निर read more >>
दिनाक→ (07/12/2022) बुधवार, शायरी→ जलने वालों को अलविदा ही ठीक हैं।
शायार→ मोहम्मद फैजान सिद्धिकी'' पिता-रईस अहमद सिद्धिकी''
अजी जानाब ह� read more >>
दुख का साथी कौन है, सुख में तो सब साथ।
रहते हरदम हैं मजे, रहे कांत में माथ।।
दुख का साथी कौन है, पल पल लब पर राम।
सुख में साथी हैं सभी, दुख � read more >>