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कलम की गूॅंज
कविता - कलम की गूंज कलम की गर्जना कड़कती रहेगी कलमों की कीमत रही है रहेगी बनी स्याही, आंसू गिरी कागज़ों पर वही दुःख
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मैं नहीं मानता
कविता = ( मैं नहीं मानता ) झूठी तारीफ़ों के पुल ! मैं नहीं बाँधता ! पत्थरों को ख़ुदा ! मैं नहीं मानता ! कर्म का लेखा लिखना मुझे ! हाथों पर भ�
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अधर्म पावक में सभी
अधर्म पावक में सभी, झुलस रहा संसार । ईर्ष्या करते हैं सभी, बातों में तकरार।। झूठ अग्नि का है कहर, झुलस रहा संसार। धोखा देते हैं सभी, रह
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धोखा देते हैं सभी रहा नहीं अब प्यार
अधर्म पावक में सभी, झुलस रहा संसार । ईर्ष्या करते हैं सभी, बातों में तकरार।। झूठ अग्नि का है कहर, झुलस रहा संसार। धोखा देते हैं सभी, रह
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गम जो आए तो कभी
गम जो आए तो कभी, छूटे मत तब हाथ। चाहत की राहें रहे, छोड़े कभी न साथ।। होली में लगते यही, सबके हाथ गुलाल। खुशियों का होता प्रतिक, करते नह�
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लोभ मोह के फेर में
लोभ मोह के फेर में, हुए बर्बाद लोग। अपना भी विरही हुआ, अमन का हो वियोग।। लोभ मोह के फेर में, टूट गया परिवार। हक्का बक्का मन रहे, ज्ञान ह�
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पिता दिवस में कीजिए
पिता दिवस में कीजिए, दिल से उनको याद। जिसने हमको तन दिया, मिले शांति सब साद।। पिता दिवस में कीजिए, भक्ति भाव का साथ। जीवन घर का स्वर्ग �
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पिता जगत मे धर्म हैं
पिता जगत में धर्म हैं, यही तप ज्ञान स्वर्ग। छाया ठंढी नित मिले, मेरे दुनिया सर्ग।। पिता अतप हैं कोठरी, ये ही हैं सब धाम। चरणों में इनके
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कविता
मै पहाड़ हूं। मै सूरज को देखकर पला बढ़ा हूं मै चांद को देखकर उसी तरह टूट जाता हूं जैसे रात को गुलमोहर अपने फूल छोड़ देते हैं .... ललित
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कुत्तों के ठाठ
* कुत्तों के ठाठ * आजकल कुत्तों के बड़े ठाठ चल रहे हैं आवारा हों या पालतू ये मजे से पल रहे हैं।। शेरू जैकी टामी जैसे अब नाम नहीं है श�
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*मंदिर के गुम्बद (शिखर) का रहस्य-* 💐प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर..... करण सिंह💐
〰️〰️🌼〰️🌼🌼〰️🌼〰️〰️〰️〰️🌼〰️🌼 *मंदिर के गुम्बद (शिखर) का रहस्य-* 💐प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर..... करण सिंह💐 〰️〰️🌼〰️🌼🌼〰️🌼〰️〰️〰️〰️�
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जी करता है तेरा बचपन मैं अपने आंखों में समेट लूं
जी करता है तेरा बचपन मैं अपने आंखों में समेट लूं ऐ वक़्त बीतता जाएगा और तू बड़ा होते जाएगा पर,तेरा बचपन सदा मेरी आंखों में रहेगी तेरी
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