‘‘यार, कैसे मर्द हो, जो दारू तक नहीं पीते! क्या अपनी बीवी से डरते हो?’’ सहकर्मी ने बीयर बार में प्रवेश की ओर निगाह डालते हुए तानेकश read more >>
( मेरी लाडो बिटिया को समर्पित मेरी यह रचना )
कविता = ( मेरी लाडो )
मेरे घर की तू है रौनक !
मेरे घर की तू है दौलत !
तुझसे मेरी सारी खुशियाँ !
मे read more >>
हजार कोशिश बिखर गई हो अगर आपकी तो फिर एक कोशिश करना अपने रिश्तो के खातिर ,क्या पता किस्मत की हिम्मत ना हो फिर से कोशिश को बिखेर जाने की। K read more >>
न जाने ये कौन सा रास्ता मैंने ले लिया,
कदम भी अब तो थकने से लगे है,
लगा कभी तो यूँ, के मंजिल बस करीब है,
पर अब तो ये शब्द भी चुभने से लगे है| read more >>
दीपावली के अवसर पर बनवारीलाल अपने घर के ड्राईंग रूम को सजाते हुए सोच रहा था, ‘‘क्या है उसके पास? न ढंग के सोफे, न अच्छी कुर्सियां, न आल read more >>
अगर कोई इंसान असमर्थ है या वो किसी कारण वश असहाय है उस पर भारी संकट आया है वो कहीं काम करने नहीं जाता है ना ही वो किसी कि मदद करता है और उस read more >>