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चलो आज जिंदगी से शिकायत करेंगे कुछ जिंदगी मुझसे कहेगी कुछ मैं भी कहूंगी read more >>
दिल करता है पीछे मुड़कर देखो उन पुरानी बातों को याद करो पर कभी-कभी ऐसा महसूस होता है कि पीछे मुड़ कर देखने पर दुखते हुए दर्द पर जैसे मैं� read more >>
न जाने क्या देखा मैंने उसकी आंखों में जो आज भी उम्र के इस दौर पर याद करके दिल को बेचैन कर देती है read more >>
हजारों ख्वाहिशें रखने के बावजूद भी आज न जाने क्यों कोई ख्वाहिशें ही नहीं बची है read more >>
उम्मीदों के इस बादल में न जाने क्यों आजकल ना उम्मीदी सफर कर रही है read more >>
हमारी जिंदगी भी एक किताब की तरह होती है जिसमें मुझे यह नहीं पता होता है कि अगले पन्ने पर क्या लिखा होगा और हमें क्या ज्ञान प्राप्त होगा read more >>
दूसरों के बारे में तो हम बहुत चाव से और बहुत ही उत्सुकता पूर्वक बातें करते हैं उनकी अच्छाइयां उनकी बुराइयां परंतु कभी-कभी हमें स्वयं क read more >>
कविता -तुम कैसी मां हो? फेंक चलीं क्यों ?दिल रोता है! कूड़े में अब दम घुटता है! अंदर ही अंदर दहता है! कितनी विह्वलता है ! मां की read more >>
मा तो सबकी प्यारी है ये तो सबसे न्यारी है। मा के जैसा कोई नहीं है ये कहती दुनिया सारी है।। मा तो कभी भी कुछ ना कहती वो तो हमेशा चुप ही रह read more >>
रास्ता जैसा भी उस पर चलना चाहिए, रिस्ता जैसा भी होगा उसे निभाना चाहिए! read more >>
भबिष्य के बारे मैं जो नहीं सोचता, बो बर्तमान मैं ही रह जाता है, बाद मैं आगे पश्चताप करने के अलाबा उसे कुछ प्राप्त नहीं होता है ! read more >>
सोचने से जो ज्ञान प्राप्त नहीं होता, बो ज्ञान अपने आप आजाता है जनाब ! read more >>
दहेज की आग एक रसोई से धुआँ उठा, आग लगी, लपटे बाहर निकली, शोर में कुछ चीखें चिल्लाती, भीड़ में लोगों की कानों आयी, बचाओ-बचाओ, कोई बचाओ, आग read more >>
तुलसीदासजी ने रामचरितमानस में शरद ऋतु का गुणगान करते हुए लिखा है- बरषा बिगत सरद ऋतु आई। लछिमन देखहु परम सुहाई॥ फूलें कास सकल महि छाई� read more >>
कविता -मन के मुलायम चल कर अपने जीवन पथ पर बदला समाज अपने बल पर निज प्यार लुटाया कर भरकर की राजनीति खूब चढ़ बढ़कर अर्पित है सुम� read more >>
अंधेरों में शाम की तलाश तेरी फिजाओं में गुमसूम सी आवाज तेरी मौजूद है, जिंदगी में सभी कैद हुऐ हम जंजिरो में अरमानों में रोशनी तेरी फि� read more >>
छांव में धूप की रोशनी है, उज्जलों में तेरी गजरती है,कई रास्ता हवाओं में रेह जाती है, नमी तेरी इस मीट्टी के कण-कण में, धरती का श्रंगार| हि read more >>
हाथ में हाथ धरकर बैठने से कुछ नहीं मिलता। सुना है, परिंदो को भी उड़ने के लिए पंख खोलना पड़ता है यह जिंदगी है साहब! यहां मेहनत का बीज जो � read more >>
हितैषी तब तक हितैषी रह पाता है, जब तक उसके निजी स्वार्थ में कोई आँच नहीं आता है। जब उसके उसके निजी स्वार्थ पर कोई आँच आ जाता है, तो वो हि� read more >>
आं....शू........ बहे उज्वला मन कि निष्ठा बन, ज़ो धरे हरित्त हरियाली कि! आं...शू........ और मान प्रत्तीष्ठा का गौरव, आंशु केशरिया उमंग सम् लाली सी!! read more >>
मेरी यादों से बचकर कहाँ जाओगे? हर पल,हर लम्हा बस.... मुझे ही पाओगे? मेरी यादों से बचकर कहाँ जाओगे? पर,मेरी यादों के सिवा मैं फिर भी तुम्हा� read more >>
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *🌳🦚प्रेरक कहानी - खोटा सिक्का💐💐* #प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर........ करण सिंह# 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 ठाकुर � read more >>
धरती होगी ऊसर, आहा, आह‌‌ में बदल गया। लंबी दूरी नाप रहा, स्वार्थ- सीढ़ी से सफ़र। बढ़गी पैदावार होगी, गुण हेतु धरती बंजर। रिश्ते नात� read more >>
देश- विदेश से घुमकर आए, भूले ना भाषा प्यारी। चाहे जितनी इंग्लिश बोले, हिन्दी है पहचान हमारी। फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी।। read more >>
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