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कविता -पैगाम वह नन्हा अबोध नासमझ को क्या पता! मां न रही अब दुनिया में, पर छुपाया गया उससे बिना कोई किए खता! वह आज भी भेजता है read more >>
आपकी खामोशी का भी क्या कहने, होंठ सीए भी बहत कुछ कह जाते हैं। read more >>
बेरूखी आपकी यूं तकलीफ देती रहें, तो सायद दिल की हर एक अल्फाज़ यूंही ग़ज़लों में तब्दील हो जाए। read more >>
कहीं जिद पूरी कही जरूरत भी अधुरी कहीं सुगंध भी नहीं कहीं पूरा जीवन कस्तूरी इसी का नाम है जिंदगी लिखना था कि खुश हैं तेरे बगैर भी यहां � read more >>
काश हम भी थोड़े , खुदगर्ज बन जाते समय निकाल कर , अपने लिए भी थोड़ा - सा सोच लेते जिन रिश्तों के लिए , खुद का वजुद ही भूल बैठे थे वो एक पल के read more >>
सुख हो या दुःख हो, मैया हमेशा मेरे साथ रहो, मेरे सर पर हमेशा आपका हाथ रहे| जय माँ लक्ष्मी read more >>
भरोसा** जितना** कीमती** होता** है धोखा** उतना** ही **महंगा** हो** जाता **है फूल **कितना **भी** सुंदर **हो तारीफ** खुशबू** से **होती **है इंसान **कितना** भी **� read more >>
सरहदो पर करने गये वो रक्षा तभी तो हम पाते सुरक्षा उन्होंने माना परिवार सारा वतन हम सब करते उन्हे सलाम read more >>
सदियो से read more >>
फूल खिले एक बार खिले ना बारंबार जीवन मिले एक बार मिले ना बारंबार उड़ा सके जितनी गमक फूल खिले एक बार जीवन मिले ना बारंबार ठौर पा सके ए� read more >>
फूल खिले एक बार खिले ना बारंबार जीवन मिले एक बार मिले ना बारंबार उड़ा सके जितनी गमक फूल खिले एक बार जीवन मिले ना बारंबार ठौर पा सके ए� read more >>
जिससे मिला रहने को थल जिससे मिला पीने को जल सांस्कृतिक लेने के लिए पवन ऐसा देश मेरा भारत महान read more >>
सदियो से चलती आ रही आज भी वह चलती है जिसने बहुतो को लूटा औसर है वह कुप्रथा जब किसी का देहा� read more >>
एक भैंस जंगल में चर रही थी। पहले उसने भरपेट घास खाई। फिर नहर पर जाकर पानी पिया। अब उसे आलस आने लगा। इसलिए वह एक छायादार पेड़ के नीचे जाक� read more >>
तेरे होने से मुझमे मै हूँ,😇 तेरे दूर जाने से मै विलुप्त हूँ, 😞 तू उगता हुआ सूरज है तो,🟡 मै तेरी पहली किरण हूँ, 💞 तू साज है तो मै रागिनी😌, read more >>
कविता - पथ दूर भले हो पथ जीवन का त्याग हौसिला कभी न मन का चलना सीखो अपने पथ पर चलते चलना बढ़ हर पग पर आलस में ना समय गवांना बिना अर्थ ना read more >>
जिंदगी में ऊंचे उड़ान उड़ते - उड़ते जीना तो हम भूल ही गए बड़ी - बड़ी अरमान पूरा करने में छोटी - छोटी खुशियां हम भूल ही गए। धन्यवाद read more >>
कविता - पथ दूर भले हो पथ जीवन का त्याग हौसिला कभी न मन का चलना सीखो अपने पथ पर चलते चलना बढ़ हर पग पर आलस में ना समय गवांना बिना अर्थ ना read more >>
दलित के घर मे जन्म लिया समाज उसे अछूत कहता था जब घर से बाहर वो निकलता कितना अपमान उनका किया जाता जब वो पढ़ read more >>
दलित के घर मे जन्म लिया समाज उसे अछूत कहता था जब घर से बाहर वो निकलता कितना अपमान उनका किया जाता जब वो पढ़ read more >>
दलित के घर मे जन्म लिया समाज उसे अछूत कहता था जब घर से बाहर वो निकलता कितना अपमान उनका किया जाता जब वो पढ़ read more >>
वो हवा भी कितनी खूशनसीब हैं जो तुजे छूकर गुजरती है सूखे ना वो फूल कभी जो तेरे सजदे में मेहकते है और देखा था कल मैंने बारिश की बूंदोको म� read more >>
लोग कहते है कि दुनिया मतलबी होती है लेकिन यह भूल जाते हैं कि हम भी इसी दुनिया का हिस्सा है। read more >>
कविता-जिम्मेदारियां जिम्मेदारियां एक बोझ है ढोने वाले पर लद जाते हैं, ना ढोने वाले को नासमझ/ नालायक/ आवारा लोग कह जाते हैं, जिम्मे� read more >>
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