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Husband: "Honey, did you hear about the new restaurant that just opened up?" Wife: "No, what's special about it?" Husband: "Well, they have a mirror hanging right above each table." Wife: "Oh, that's interesting. Why would they do that?" Husband: "So, when we're eating, it'll look like we're actually having a romantic dinner instead of staring read more >>
Husband: Honey, do you remember when we got married? It feels like a lifetime ago! Wife: Of course I do! How could I forget the happiest day of my life? Husband: Well, I guess we're both doing pretty well then. I mean, look at us now, still tolerating each other after all these years! Wife: (laughs) Oh, come on, dear. Tolerating you is my read more >>
Wife: Honey, I've decided to take up yoga to relax and find my inner peace. Husband: That's great, dear! Maybe I should join you too. Wife: Oh, really? Why is that? Husband: Well, if you're finding inner peace, I might finally get some peace and quiet around here! read more >>
(दोहा छंद) सच कहना अपराध है, यह तो गहरा पाप। हम सब अटल विरोध कर, करूं सत्य का जाप।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(द� read more >>
(दोहा छंद) नफा और नुकसान का,रखिए प्रतिदिन ध्यान। कारण को तब जानकर, प्रगति करे इंसान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्ती� read more >>
(दोहा छंद) सदा लक्ष्य हो प्रगति का,रखता हूं मैं ध्यान। करता अथक प्रयास मैं, बढ़ता मेरा ज्ञान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिल� read more >>
(दोहा छंद) अड़चन बिन जिदगी नहीं, करें सामना आप। कामयाब होंगें सदा, मिले नहीं संताप।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीप read more >>
दोहा छंद सुनकर मेरे शेर को, दे ताली सब लोग। हसी खुशी में झूमते,कानों से कर भोग।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(द� read more >>
(दोहा छंद) एक सूत्र में बंध कर, करिए कार्य महान। सदा करें जग का भला, बने रहें इंसान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपु� read more >>
दोहा छंद शिक्षा का सम्मान हो,सबको हो यह ध्यान। घर घर शिक्षित तब बने, हो उन्नत विज्ञान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस� read more >>
(दोहा छंद) समय बड़ा दृढ़ है गुरू, देय तजुर्बा खास। बढ़े ज्ञान की धार तब,लिखता हूं इतिहास।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_सम� read more >>
(दोहा छंद) रहें साफ दृढ़ वास्तविक, जिएं न्याय के साथ। कर खंडन अन्याय का, लें यश अपने हाथ।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह ✍🏼 जिला:_सम� read more >>
(दोहा छंद) धरती ने धारण किए, हीरा पन्ना रत्न। सर्व खनिज से पूर्ण हैं,पाने को कर यत्न।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्ती� read more >>
जो हम देते है लोगों को बही हमे रिटर्न मिलता है चाहे बो दया हो यार फिर दुआ।। read more >>
प्रेम युगल गीत ---------------- ये सजना की माझे, मन गहिवरती वेळ ना होवो प्रिया, तुला येतानी...-२ वाट बघुनी निघुन गेला, वसंत घाटी बघ पातीवरील फुल� read more >>
अगर प्यार ही सब कुछ है तो लोग छोड़ क्यों देते हैं। read more >>
बेकरार हुआ मौसम एकरार करने आया हम खुशनशीव है,वो हमें भींगाने आया है काली घांटा छा रही बादल हवाओ ने दौडाया कहीं पडती छोटी बुँदे जमीं read more >>
"किरदार" "ये जररूतों का दौर है,साहब इसलिये किरदार पर मत जाईये जो इंसान होता है वो दिखाई नहीं देता,जो दिखाई देता है, वो वास्तविकता मे किर� read more >>
दोहा छंद हर मुश्किल आसान हो,सदा करें जब यत्न। खुशियाँ जीवन में रहे, लगे परिवार रत्न।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्त� read more >>
दोहा छंद राधा माधव एक हैं, कभी नहीं ये अन्य। एक जान दो तन रहे, जो करते हैं धन्य।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(दे read more >>
एक सोबती असावी, जीवनात साथ फक्त चार भिंतींची नसावी. ऐनवेळी तर सावली पण साथ सोडते म्हणा, शेवटी या थर थरत्या हातात , हात देणारी एक कुणी त� read more >>
दोहा छंद नयनों की सीमा रहे,मिले खुदबखुद प्यार। करते तब इजहार भी,फिर होता स्वीकार।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीप read more >>
दोहा छंद सदा असन चित से करें,रहे वदन मजबूत। सपने सारे तब खिले,जीवन हो शहतूत।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देव� read more >>
दोहा छंद कलियुग के इंसान में,मची भयंकर होड़। भागम भाग विशेष है,दिखते हैं बेजोड़।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह ✍🏼 जिला:_समस्तीपु read more >>
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