पैरों में काला धागा माथे पे सिंदूर लगाती है
सीधे साधे look में ओ सबको दिवाना करती हैं...!
गुलाब जेसि महक है उसके बालो की
आँखो में प्यार का न read more >>
आरंभ हो चुका है अंत का
अनंत में जो व्याप्त है,
शंखनाद उल्लास है
जगी ये कैसी प्यास है,
भाव विभोर हो चुकी
हृदय में उठती टीस सी,
बस नयन छलक � read more >>
जीवन मे सुख और दुख का एक ही आकार है फर्क बस इतना है कि सुख के आकार को हम भरते नहीं और दुख के आकार को गिन गिन के भरते हैं
लेखिका प्रेरणा शर् read more >>