आज मेरी कविता की लय
मिलती नहीं, खो गई कहीं
मन भी आज धुंधला है,
रंगत उसकी खो गई कहीं।
शब्द भी मेरे गुम हैं कहीं
मिलते नहीं, भटकते हैं सभी
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पीड़ा में जीवन, थक सा गया हूँ,
क्या दोगे आके तुम सहारा?
निश्छल प्रेम की कोमल ममता, हृदय में बहती है,
उथला मन, तुम्हारे ही किस्से कहता है।
म read more >>
आज भी मोती सा चमके दिल की कोठरी में कहीं। आज बस बेबस खड़ा हूँ,
जैसे कुछ रहा ही नहीं। दर्द से थका, हारा मन, अशांत, व्याकुल है आज। भ्रमित जीव read more >>