जाने क्यों कुरेधती हैं मन की मलाल,
जो बीत गया हैं दौर ,
जाने वो कौन सा दिन होगा,
जिसमें भूल जाए वो दौर,
आसान नहीं पर नामुमकिन भी नहीं,
थोड read more >>
यह यह कविता अर्जुन शर्मा के द्वारा लिखी गई हैं अगर इसमें कोई भ्रम फैलाने वाले शब्द हो तथा कोई गलत शब्द हो या कोई गलत लाइन लिखी गई हो तो क� read more >>
नव - युग के नौजवानों बदल दो ये जमाना ,
इस युग का सृजन करना फर्ज है तुम्हारा
जमाना है महाभारत का तू कृष्ण की मूरत बन जा,
गली - गली में हैं च� read more >>
चुपके से कानों में कुछ बात कह दो ना,
गजरे को गुलशन, गेसुओं को रात कह दो ना ।
चूड़ियों की खन खन पे फिसलते जज्बात कह दो ना,
पायलों की छन -छन प� read more >>
घाब भी अपना दा ओ भी अपना
जो दिया वो हाथ भी अपना !
हवा के रुख मोड़ दो
या नव के दिशा बदल दो
जीने के लिए लड़ना होगा
या फिर जीना छोड़ना होगा !!
ए read more >>