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जाने क्यों कुरेधती हैं मन की मलाल, जो बीत गया हैं दौर , जाने वो कौन सा दिन होगा, जिसमें भूल जाए वो दौर, आसान नहीं पर नामुमकिन भी नहीं, थोड read more >>
यह कविता अर्जुन शर्मा के द्वारा लिखी गई है किसी भी प्रकार का गलत शब्द हो और कोई भी प्रकार का गलत लाइन लिखी गई हो तो क्षमा करें। अगर प्रा� read more >>
यह यह कविता अर्जुन शर्मा के द्वारा लिखी गई हैं अगर इसमें कोई भ्रम फैलाने वाले शब्द हो तथा कोई गलत शब्द हो या कोई गलत लाइन लिखी गई हो तो क� read more >>
क्यों होता है ऐसा जिसपे करें हम भरोसा उसी से मिलता है धोखा अब दिल को आता नहीं यंकी किसी पे भी कहीं फिर कोई ठोकर न दे दें कहीं फिर गिर के read more >>
नव - युग के नौजवानों बदल दो ये जमाना , इस युग का सृजन करना फर्ज है तुम्हारा जमाना है महाभारत का तू कृष्ण की मूरत बन जा, गली - गली में हैं च� read more >>
चुपके से कानों में कुछ बात कह दो ना, गजरे को गुलशन, गेसुओं को रात कह दो ना । चूड़ियों की खन खन पे फिसलते जज्बात कह दो ना, पायलों की छन -छन प� read more >>
घाब भी अपना दा ओ भी अपना जो दिया वो हाथ भी अपना ! हवा के रुख मोड़ दो या नव के दिशा बदल दो जीने के लिए लड़ना होगा या फिर जीना छोड़ना होगा !! ए read more >>
मुलाकात होती तू होती तो कुछ बात होती नजरों से नजरों की मुलाकात होती ! रूह रूह से मिलता हमारी मोहब्बत साकार होती !! तू होती तो हमारा � read more >>
रात के तन्हाई में आश्मान में चाँद तारे और सितारें जग मग जग मग टीम टीम करता जुगनू बहु तेरे! मदहोशी में मदहोश अलवेला अल्हड मौसम वसंत� read more >>
किस बात कि अकड़ हैं जो इतना तू अकड़ती हैं! शीशे का तेरा बदन हाथ लगे तो टूट जाएं किस बात की रोष हैं जो इतना तू धधकती हैं!! मैंने तुम को दे� read more >>
समाज के जंजीर में बंधा वेडियों में चुपचाप जकड़ा न टूटता न तोड़ पाता समाज के मिथ्या इजाद ! सत्य पे असत्य का बोल बाला जबरजस्त हैं टुकड़ो read more >>
जो सुकून दे बेफिक्र हैं इस लिए दर्पण सा वेहबार रखते हैं फ़िक्र वो करे जो चेहरे दो चार रखते हैं! जो सुकून दे मन को वो काम करते हैं डरे � read more >>
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