मैं ना धुंध हूँ ना राख हूँ,
जिंदगी है मौत से मैं मौत के ही पास हूँ ll
राज से द्रोह है ,
और दंश से मोह है ,
कंटको के बीच हूँ मैं
कंटको का लोभ ह read more >>
रोती छत-सिसकता फर्श
उस घर की टपकती छत ने,
घर के फर्श से कहा होगा-
कि माफ़ करना, हालत अभी बुरी है।
घर के गीले फर्श ने,
हँसते हूए कह दिया हो read more >>
कविता ( ख़ानदानी )
ख़ानदानी उनको !
कहता ये जहान !!
चरित्र से जो गिर गए !
पैसे से मालामाल !!
नग्नता की देखो !
क्या दी मिसाल !!
फ्रैंकली शब्द क� read more >>
गुजरे वक ,के कुछ लम्हे,
योहि । आज याद आ गये ।
दीवार पर लगी । देखी तेरी तस्वीर,
मन ही मन मुस्करा उठा ।
खुद से ,याद आने लगा।
बचपन का प्यार भ� read more >>