⭐ कविता = ( परदेश )
कैसा ये परिवेश हुआ !
घर ही मेरा परदेश हुआ !!
एक ही छत के नीचे !
जैसे पूरा देश हुआ !!
घर के हैं जो घरवाले !
आज हुए वो बाहरवाले read more >>
बहुत बोलने लगा हूं कही तुझे चुबने तो नही लगा हूं ......
इस बेवफा दुनिया में वफा। करने लगा हूं
दौड़ती हुई दुनिया के बीच चलने लगा हूं
कही तु� read more >>