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अतीत की उत्कृष्ट मसला पुराने घाव खुरदने लगे कुछ वादों की झलकियाँ हर छण याद दिलाने लगी काली साये में लिपटा अतीत के आधा अधूरा सच डा� read more >>
कविता -भूख भूख की कामना है मिले रोटियां रहे सम्मान ना या बिके बेटियां भूख की आग जलती है बुझती कहां? इसके आगे ना दिखती है जन्नत जह read more >>
*जमाना बदल गया* देखो हमारा जीवन केसे निकल गया परिवर्तन इतना हुआ कि ज़माना बदल गया।। उसको पकड़ सके न हम फिसलता चला गया ऐसी चली हवा कि read more >>
सुखी रंगों को सबने पुकारा, दु:खी रंगों को किसने पुकारा।। मां अपने बेटे को नौ महीने तक पेट में रखती हैं। उस दु:खी रंगों को किसने पुकारा read more >>
कविता - मेरे स्कूल का दूध (एक घटना) दुःख ही जीवन की कथा रही यह सदा कष्ट की व्यथा रही। कब तक कोई लड़ सकता है! कब तक कष्� read more >>
मैं फूल हूँ काटों से लिपटा रहता हूँ कही भी कही भी हर मौसम में मिलता हूँ मैं कोमल हूँ और नाजुक भी मैं फूल हूँ मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद read more >>
मैं फूल तू काटा फिर भी दोनों आधा आधा तू मुझ से दुखी दुखी फिर भी रक्षा करता हैं मैं कोमल नाजुक कली तू निठुर काटा फिर भी दोनों आधा आध read more >>
मन की चिंता तन की चोट कौन देखेगा किसे दिखाऊ जख्म देने बाला भी अपना अच्छा रह जाना है मौन बदन का भूख जिस्म की प्यास हृदये के पीड़ा समझ� read more >>
मैं बचपन हूं मुझे क्यों? सताया जा रहा अभी तो उड़ना सीख रहा था,कि चार दीवारों में डाला जा रहा, आंचल का तो पता नहीं पर बसते की बोझ में द read more >>
तू रुत होती धुप होती रंग थोड़ा रूप होती तू गुल होती गुलशन होती फूल और फूलबड़ी होती दो बून्द महक थोड़ा सा खुशबु होती तो कही गुलदान में ब read more >>
*बुढ़ापे में मस्ती कीजिए* बुढ़ापा आ गया तो आने दीजिए उम्र ढल गई तो ढ़लने दीजिए।। उम्र अब कितनी बची है चिंता न इसकी कीजिए बचपना दिल read more >>
कविता‌ = मशहूर दिलों में जगह यारों बस हो तुम्हारे ! इस घर का मालिक जब भी निकाले !! सल्तनत दिलों की हो मेरे हवाले ! इस घर से बेशक अभी है नि read more >>
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