रचना- जितेन्द्र शर्मा
तिथी-15/02/2023
कविता-
हे पतझड़! तेरा अभिनन्दन!
यह सन्देश है नव चेतन का, नव योवन का,
नव जीवन के पाने का।
पुष्पित और पल् read more >>
रश्मों-रिवाजों से बगावत ही सही.,
ओ नहीं मेरी पर उनसे मोहब्बत तो है.,
इश्क में हम हार भी रहे है हम जीत भी रहे है.,
ना हम दिख रहे है ना उन्हें � read more >>
कविता-पत्नी से पंगा!
रचना- जितेन्द्र शर्मा।
तिथी- 13/02/2023
बेशक मैं कुल का वाहक हूं,
वो दो दो कुल की प्यारी है।
समय न पढ़ पाया जिसको,
उलझी ह read more >>
कविता = ( अश्कों की धार )
ठोकरों की पछाड़ से !
बेवफ़ाई की कटार से !!
मंज़िलों की लताड़ से !
गर्दिशों की मार से !!
पैदा हुआ ये कवि !
अश्कों की धार स read more >>
जता दूँ क्या ?
______________________
इश्क़ में मैं घुट रहा
ये अंतर्मन का द्वंद्व है
कैसे बता दूँ मैं तुम्हें
तुम कौन हो मेरे लिए ?
सपना ख़्वाब ज़ाम
read more >>