बीक रहा है पानी,पवन बीक ना जाए
बिक गई है धरती, गगन बीक ना जाए
चांद पर बिकने लगे हैं, ज़मी
डर है कहीं सूरज की तपन बीक ना जाए
हर जगह बिकने ल read more >>
एक कहानी है मेरी जो अधूरी रह गई
करने बैठा था पूरा स्याही ही कम पड़ गई
जेल पेन समझ के मैं लिखता गया वो चलती गई
में लिखता गया वो चलती गई, कम read more >>
जो इंसान संघर्ष के बालू में दौड़ लगाता है उसी इंसान के पास अनुभव का खजाना होता है इसलिए कभी भी अनुभव की कमी महसूस हो तो उस इंसान के पास ज� read more >>
रचना- "नारी तू अविचल है।"
रचनाकार- जितेन्द्र शर्मा
विधा- कविता
तिथी-29/12/2022
नारी!
नारी तू अविचल है।
पंकज सी कोमल है पर द्रढ है तू गिरि read more >>
आज मै टूट कर बिखर चुकी हू........ तुम्हारी वजह से
हाथ में चुभे कांटे निकल जाते है .........
सीने में चुभी तीर निकल जाते है........
लेकिन मन में चुभे read more >>
ये जिंदगी की रफ्तार है साहब ये तो अपने हिसाब से चलता रहेगा
समय कैसा भी हो किसी का वो भी वक्त के साथ निकलता रहेगा
अगर कुछ करना है तो वक्त � read more >>