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कविताएँ
कविता = ( भीड़ )
#माननीयश्रीअटलबिहारीवाजपेई माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेई जी के सुशासन दिवस पर उनके चरण कमलों में समर्पित मेरी यह रचना कविता = ( भीड़ )
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जिम्मेदारियां
कविता-जिम्मेदारियां जिम्मेदारियां एक बोझ है ढोने वाले पर लद जाते हैं, ना ढोने वाले को नासमझ/ नालायक/ आवारा लोग कह जाते हैं, जिम्मे�
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डॉ भीमराव अंबेडकर
दलित के घर मे जन्म लिया समाज उसे अछूत कहता था जब घर से बाहर वो निकलता कितना अपमान उनका किया जाता जब वो पढ़
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पथ
कविता - पथ दूर भले हो पथ जीवन का त्याग हौसिला कभी न मन का चलना सीखो अपने पथ पर चलते चलना बढ़ हर पग पर आलस में ना समय गवांना बिना अर्थ ना
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पथ
कविता - पथ दूर भले हो पथ जीवन का त्याग हौसिला कभी न मन का चलना सीखो अपने पथ पर चलते चलना बढ़ हर पग पर आलस में ना समय गवांना बिना अर्थ ना
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औसर
सदियो से चलती आ रही आज भी वह चलती है जिसने बहुतो को लूटा औसर है वह कुप्रथा जब किसी का देहा�
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फुल रुपी जीवन
फूल खिले एक बार खिले ना बारंबार जीवन मिले एक बार मिले ना बारंबार उड़ा सके जितनी गमक फूल खिले एक बार जीवन मिले ना बारंबार ठौर पा सके ए�
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Alive
काश हम भी थोड़े , खुदगर्ज बन जाते समय निकाल कर , अपने लिए भी थोड़ा - सा सोच लेते जिन रिश्तों के लिए , खुद का वजुद ही भूल बैठे थे वो एक पल के
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इसी का नाम है जिंदगी
कहीं जिद पूरी कही जरूरत भी अधुरी कहीं सुगंध भी नहीं कहीं पूरा जीवन कस्तूरी इसी का नाम है जिंदगी लिखना था कि खुश हैं तेरे बगैर भी यहां �
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पैगाम पर कविता
कविता -पैगाम वह नन्हा अबोध नासमझ को क्या पता! मां न रही अब दुनिया में, पर छुपाया गया उससे बिना कोई किए खता! वह आज भी भेजता है
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बाबा साहेब।
लेकर कलम कागज़ हाथ में, एक नायक चले थे। तन पर नीला कोट एक, आँखों में लेके अरमान चले थे। कुनीति तोड़ने की पहल थी,लेकर भारत आज़ाद चले थे। �
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जीते हैं आजकल
तुम्हें देखकर हम जीते हैं आजकल हर आहट से होती है दिल में हलचल तुम ही तुम हो हर घड़ी हरपल तुम्हीं से होती है मेरी दिन की शुरुवात ख़त्म भ
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