धिरे धिरे जब से तु मेरी होती जा रही हो।
धिरे धिरे तू मेरी करीब आ रही हो।
मैं खुद का ही नही रह पा रहा हूँ।
मैं खुद को ही अपना नहीं कह पा रह read more >>
' अब छोड़ो भी यार ' ऐसे कहते हुए निगार अपने पति नरेश को मनाती है, मगर अफसोस उसका पति मानने की जगह उसके हाथ को छिटक कर आगे चला जाता।वह फिर भी read more >>