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पहुंच
चांद तू क्या था, क्या हो गया? भारी- भरकम पेड़, बुढ़िया सरसर सूत कातती। बैठी बूढ़ी आंखों से, जवां जहां को ताकती। बच्चों को बहलाती मां, चा�
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गिरधर गोपाल
जय श्री राधेकृष्ण पेज-1. , ,,गिरधर ,, लेखक- केदार अमीन , (log line) भगवान् श्री राधा कृष्ण के भक्त की बनती बिगड़ती इज्जत की कहानी
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पीने दे
मत रोक मुझे तू पीने दे कुछ दिन और जीने दे. मत रोक मुझे तू पीने दे. इतनी पिला दे मुझको साक़ी.
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तेरे संग मेरे यारा
लिखती और गुनगुनाती जा रही हूँ हसीन कहानियाँ तेरे संग मेरे यारा याद आ रहे हैं वह पल जब दुल्हन बनाई थी घर संग तेरे मेरे यारा दुःख-सुख ह�
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प्यार
सच्चा प्यार दिखाया नही जाता। सच्चा प्यार बताया नही जाता। हे दिल में जो उसे छुपाया नही जाता। हे मुश्किल उसे समझना जहा प्यार जताया नही
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सादगी
एक बार एक व्यक्ति ने मुझसे कहा कि चलाकी जरूरी है। चालाक बनो सीधे-साधे रहोगे क्या मिलेगा। कुछ ना मिलेगा पर वह यह ना जानता था। जो उसमे मिल
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वस्ल
ये खिजां का महीना अबके लम्बा चलेगा उन्होने वस्ल की तारिख बढ़ा दी है।।
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जीवन- संध्या
सही- गलत, गर्हित , सहल हो लिए साथ। मूसलधार हो रही, छल-छंद की बरसात। कठिनाइयां कह रही, तू डाल मैं पात। अवसर तुझसे कह रहे, नाप तेरी औक़ात। छ�
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आया फिरंगी आया
आया फिरंगi आया, लूटा दोनो हाथों से ।। तब आई लक्ष्मी बाई, स्वतंत्रता की पहली चिंगारी थी उसी ने जलाई। मंगल पांडे ने प्रथम स्वतंत्रता सैन
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Dada g
आज मेरे अपने मेरे खिलाफ खड़े है। पर, मेरे दादाजी के संस्कार मेरे साथ खड़े है। आज जब मै पिछे मुड़कर देखता हूँ तो बचपन के वो हसिन दिन दादा क�
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किस्मत और कर्म(दोहा)
दोहा- किस्मत के पन्ने खोखले, लिख तु कर्म मसि लेत। अधर्म सुं दुख अपार है, सद्कर्म सु फल देत।
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तुलसी
रिश्तों के धागे में मैं बंधा, बहती हुई नदियों की तरह मन बह रहा तुलसी तुम से मिले बिना चाचा का अब रिश्ता टूटा सा लग रहा, एक मासूम सी कल
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