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गाल तुम्हारे रसगुल्ला से कम तो नहीं। हरेक अंग किसी अप्सरा से कम तो नहीं। जिसके आने से नहीं होता है अँधेरा_ तुम तो यार सूर्य की किरण से � read more >>
आईने की तुझे जरुरत नहीं तुम खुद एक आइना हो। शीशे जैसा चमकता तेरा बदन तुम एक मृदु हसीना हो। देखने के बाद लोग खुदबखुद चार्ज होने लगता है_ read more >>
हरी चुनरिया ओढ़कर,धरती लगती खूब। सावन जल बरसे अभी,चमक रही है दूब। काले बादल मस्त है,वसुंधरा है मग्न_ जो देती है अति खुशी,चाह सभी मंसूब। read more >>
(मुक्तक छंद) क्या हो गया आज लोगों को बात _बात में लड़ जाते हैं। ईर्ष्या की आग में जलकर लोग स्वयं भस्म हो जाते हैं। खुद मत जलें भाइयों इस � read more >>
कब यह नेत्र आंसुओं से रिक्त होंगे क्या ह्रदय खुलकर कभी हंस पाऊंगी मैं। यह सृजन क्षण में नहीं होगा कभी मांगू अगर आकाश तो बादल ही पाऊंग� read more >>
भला लागे- वो रात चांदनी, हुस्न-ए-दीदार भला लागे..! भला लागे महबूबा- मोहब्बत ए-दीदार भला लागे..!! -मोती read more >>
रात शबनम- महकता हुस्न ए-चांद देखा है..! महबूब के साये- मोहब्बत को जागते देखा है..!! -मोती read more >>
बुरा वक्त ना होता यारो अकेला मानस बुरा होया करे दुनियां में वा सबते बढ़िया जिसके अपने होया करे बिन माया कोई साथ देता "पंडित" सबते कया क read more >>
ईश्वर ने ये कैसा घटना चक्र रचा। नियति की गोद में क्या पल रहा। क्या कहॉ?.... एक कुमारी कन्या ने सुत जना समाज के भय से बो कुछ ऐसी थी अकुलाई भ read more >>
"मतलबी होना तो इंसान की फितरत है साहब" "बारिश रुक जाने के बाद छतरी भी बोझ लगने लगती है" आजकल तो वस्तु शुद्ध नहीं मिलती इंसान तो दुर की बात read more >>
नारी झुकती नहीं किसी के आगे, पर बिछ जाती है अपनों के आगे । अपने सपनो को पलकों से उतरने देती ही नही, दूसरो को खुशी देने के लिए, दबा देती ह� read more >>
नयी हसरतों के दीये जल रहें हैं, यौवन का अभी समय है निर्माण कर ले। संगीत के धुन सा धड़कन भी धड़के, सोला सा रक्त भी अनवरत भड़के। नैनों मे� read more >>
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