(मुक्तक छंद)
क्या हो गया आज लोगों को बात _बात में लड़ जाते हैं।
ईर्ष्या की आग में जलकर लोग स्वयं भस्म हो जाते हैं।
खुद मत जलें भाइयों इस � read more >>
ईश्वर ने ये कैसा घटना चक्र रचा।
नियति की गोद में क्या पल रहा।
क्या कहॉ?....
एक कुमारी कन्या ने सुत जना
समाज के भय से बो कुछ ऐसी थी अकुलाई
भ read more >>
"मतलबी होना तो इंसान की फितरत है साहब"
"बारिश रुक जाने के बाद छतरी भी बोझ लगने लगती है"
आजकल तो वस्तु शुद्ध नहीं मिलती इंसान तो दुर की बात read more >>
नारी झुकती नहीं किसी के आगे,
पर बिछ जाती है अपनों के आगे ।
अपने सपनो को पलकों से उतरने देती ही नही,
दूसरो को खुशी देने के लिए,
दबा देती ह� read more >>