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मुसाफिर तू अपना रास्ता बनाके चल , हो लाख कंकर उसको अपना बना के चल उड़ा कर ना ले जाए तुझे लालच की आंधियां अपने हिस्से का बस तू खाके चल। read more >>
उलझा है संसार यह,भौतिक सुख में लोग। नहीं सूझता और कुछ, सभी चाहते भोग।। उलझा है संसार में,समझे सब जन खेल। अपनी अपनी सोच है,होगा कभी न मे� read more >>
उलझा है संसार,मोह माया में जनता। करते यहां तलाश,काम सबका है बनता।। सबको सबमें होड़,मेहनत से हो आगे। रहे सदा आनन्द, खुशी से सब दुख भागे। read more >>
व्यर्थ नहीं जाता कभी,अच्छी सोच विचार। केवल खुशियाँ ही मिले, जीवन हो गुलजार।। व्यर्थ नहीं जाता कभी,किए गए शुभ त्याग। सदा दिव्य परिणा� read more >>
केवल खुशियां ही मिले, जीवन हो गुलजार। व्यर्थ नहीं जाता कभी,अच्छी सोच विचार।। अच्छी सोच विचार,वरदान लगता हमको। मन में रहता ज्योत, दिखा read more >>
देखो झूठी शान के बदले किसी का अपमान ना करना मिल जाए तुमको लाखों पर पाई भर का अभिमान ना करना, देखो कहता बात खरी लग जाए चाहे बुरी। read more >>
धरा वसन्ती हो गई,लहर खुशी की खूब। माँ धनदा स्व आ गई,चढ़े पान फल दूब।। धरा वसन्ती हो गई,घर घर में है हर्ष। पूजा मय आँगन लगे,प्राण करे उत� read more >>
निगाह उठती ही नहीं किसी और के तरफ एक शख्स का दीदार मुझे पाबंद कर गया। read more >>
फिर प्रणय के गीत गाएं। हो गए उत्पन्न मन में द्वंद दुविधा मोह माया जगत को मन में बिठा कर कर लिया निज मन पराया प्यास में ही दोष है प्र� read more >>
*संजना - एक अनोखी दास्तान,* "कहाँ जा रही है, संजना बहू... ?" बाईक की चाबी उठाती हुई संजना से सास ने पूछा... "माँ की तरफ जा रही थी मम्मी" "अभी तरस� read more >>
वो कत्थई आंखों वाली कौन है। सुना है बड़ा ही सुरूर रखती है और लहजे में वो अपने नज़ाकत का शऊर रखती है। मान बैठी है बो खुद को हुस्न - ए- सीर� read more >>
परिंदों के संग उड़ने की ख्वाहिश थी हमें, पर हम खुद को ही गिरा बैठे। परायों को अपना बनाने की ख्वाहिश थी हमें, पर हम अपनो को ही पराया बना ब read more >>
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