शुक्र है !मैंने तुम पर ऐतबार न की!
समय रहते ही खुद को! संभाल लिया !
जिंदगी तबाह न की !
जिस दिन से तुमको चाहा किसी
और की चाह न की?
न जाने !
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नहीं चुभता है,क ईबार बेगाने से,
चलो हम डूब गए, किसी बहाने से।
संग था,अपनापन था, जिन्दगी आसान थी,
घिरे मझधार में ,नही बुलाने से।
चलें जिस भ read more >>
माना कि जिंदगी कभी-कभी बहुत इम्तहान लेती है,
पर कुछ अच्छे के लिए आगे वो तैयार भी तो करती है,
जीवन में कुछ पल के दुख के लिए क्या हम वो सार� read more >>
युग- युग ने यह गीत गाया, अत्याचारी कभी बच नहीं पाया ।
जिस ने किया अत्याचार उसको पड़ी समय की मार ,समय कभी राम बनके आए ,ना माने अत्याचारी पु read more >>