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मैं चित्रकार हूँ कलाकार हूँ पत्थर तरास ता हूँ और मूर्त बनाता हूँ चटान को काट के राह बनाता हूँ मैं एक तस्कार हूँ मैं सपना बुनता हू� read more >>
मै देश बदलना चाहता हूँ मैं देश बदलने आया हूँ नेताओ के जात इनकी औक़ात दिखाने आया हूँ हिंदुस्तान के युवाओ कि आबाज़ उठाने आया हूँ मैं ध read more >>
तु ही तो है दिशाओं को बताती जख्मे सहलाती हवाओ में फैलने वाली फिजाओं को सजाती प्रकृति से सुशोभित ओश की शबनमी बूँद मेरी सोच में तैरन� read more >>
वादियो ने छेड़ दिया है राग हवा ने छेड़ दिया है साज आसमां में लहराती तेरी जुल्फ मेघ को सजाती लग रही थी आज तेरी बलखाती जुल्फे कमाल कर र� read more >>
मेरी जिन्दगी खाली-खाली क्यो लग रही है कोई नही मेरी जिन्दगी में पर तु कही है मेरी जिन्दगी खाली-खाली क्यो लग रही है जिन्ने तारे तु गिन read more >>
तेरी  ममता  अपरम्पार।  जो  भी   आया   तेरे   द्वारे विश्व विजेता या  रण- हारे,  तूने दी  है  छाँव  कृपा  की  दिए सभी � read more >>
सुबह आई शाम आई फूलो सी महकी खुशबू सी चेहकी/ वो लम्बी चोच वाली वो लम्बी पूच वाली मखमल सी कोमल सी नीले पंखों वाली ' चिड़िया' सुबह आई श� read more >>
अगर तुम आते तो ना लगता सूना आँगन अगर तुम आते तो ना लगता सूना सावन/ तुम्हारे आने से अगर लगता सूना आँगन तो बन्द दरवाजो मे, मैं छुप read more >>
चलता है बिना सहारे के बस आशा की उपेक्षा करता है दे साथ तू उसका, यही आश रखता है, छूट गया साथ अब तो जमाने से चलता है बिना सहारे के/ बन्द थी read more >>
भंडारा और तीन दोस्त ★★★★★★★★★★★★★★★★★★ *प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर..... करण सिंह* ● तीन दोस्त भंडारे में भोजन कर रहे थे। उनमें से... read more >>
वाह! क्या कहना बाल जीवन का। यह उन्मुक्त, पक्षी नील गगन का। बालक विश्व में, ईश्वर की अनुपम विभूति। विधाता की सुंदर रचना, प्रकृति की निध� read more >>
दीवाली एक हर्सोल्लास त्योहार की परिभाषा है, दिए के लौ के साथ लाये खुशियों की वो आशा है। हर घर के कोनों के संग में, हर मन के अंधेरों के र� read more >>
समय था एक, जब अकस्मात हुई थी, कुँवारी कन्या थी मरियम,जिनकी समाज मे जान पहचान हुई थी। यूसुफ़ थे उनके जीवनसाथी, जिनसे वह ब्याह रचायी थीं। read more >>
अगर मुस्कुरा भर दूं, अगर गुनगुना भर दूं, लोग सवालें चार पूछेंगे, "बात क्या है"? ये दिन-रात पूछेंगे। मैं अगर लिख देता हूँ, बातें कई हस read more >>
उल्फत की वह शाम थीं, रंग भरी मिजाज थी। अपने _ आप में हुस्नों हिजाब थी, चांद को शर्माती, वह हसीना, आलीशान और बेमिसाल थीं। कदमों में इश्के read more >>
मैं क्या कहु किस से कहु क्यों कहु किस लिए कहु बो मुझे भूल गए सदा के लिए अब तो यादों में भी न रहे बात और जज्बातों में भी न रहे बो मुझे छ read more >>
बातों से मन भरता नहीं मुलाकात कभी होती नहीं रूठे रूठे से रहते है आज कल क्या कहु या न कहूँ उस से क्या क्या गुजरता है दिल पे बो मेरा ह� read more >>
असांभव् को संभव कर दे ये मेरे हमदम हमराज निराशा को आशा में बदल दे ये मेरे हुजूर मेरे सरकार रिश्तों में मीठास भर दे ये मेरे प्रीतम प्� read more >>
जब तक है दम में दम तू रहे गा मेरा सनम जब तक साँस बाकि है मेरे सीने में तब तक रीत निभाते निभाते प्रीत करना हम भूल गए तुझे सवारने के चक read more >>
स्थिति और परिस्थिति समान सी है दुःख के अवधि आश्मान सा है अक्सर लोग सुख के कामना करते है पर कौन जानता सुख के आयु मुस्कान सा जब रात के च� read more >>
मजबूर कलेक्टर, लेखक = शशिकांत सिंह किसी जिले के एक गांव में प्रमुख सड़क के बगल में मंत्री जी के साले का मकान बना था जिसके चबूतरे रोड को � read more >>
*✍🏻🕉️*🌷🌷🌷🌷 *छत्रपति शिवाजी महाराज की महानता..........* प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर..करण सिंह 👇👇👇 शिवाजी महाराज के सामने जब किसी सुं� read more >>
जो चाहता है मिरी जीस्त यूँ ही बर्बाद रहे ख़ुदा करे वो शख़्स सदा आबाद रहे जिसके लब से निकली है मिरे हक़ में बद्दुआ मिरी दुआ है तमाम उम्र read more >>
कविता-बेरोज़गारी के हाथ आदि अंत हो या अनन्त हो मिटी कहां है क्षुधा किसी की सायद इसी लिए ही ईश्वर कर खाने के लिए हाथ दी इन हाथों से मे� read more >>
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