# कविता और कवि ...
ये तो है ,
बिखरती चांदनी ,
गुनगुनाती रागनी ,
महकती बहती हवा ...!
किसी ने दर्द ,
किसी ने मरहम
किसी ने खुशी ,
किसी ने गम कहा ...!
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कविता और कवि ...
ये तो है ,
बिखरती चांदनी ,
गुनगुनाती रागनी ,
महकती बहती हवा ...!
किसी ने दर्द ,
किसी ने मरहम
किसी ने खुशी ,
किसी ने गम कहा ...!
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पहन लेते है ज़ब ये वर्दी इस तन पर
तब हम हम नहीं रहते है,
जो रह चुनी है देश की खातिर
हम हर पल आगे रहते है,
छुट्टी लेकर आयी थी भाई की शादी की
फ़� read more >>
!! *दिव्यांग -दृष्टि हीन और लालटेन* !!
एक गांव में एक दिव्यांग - दृष्टिहीन (अंधा) व्यक्ति रहता था। वह रात में जब भी बाहर जाता, एक जलती हुई लाल read more >>
# महुआ के फूल ...
आदिवासियों का ,
है यह जीवन मूल
खिलने लगे हैं ,
अब महुआ के फूल ...
तपिश बड़ी ,
झुलसाती
नहीं कहीं ,
कोई छईआं...!
इस मौसम ,
टप - ट� read more >>
# स्त्रियां ...
एक स्त्री ,
दूसरी स्त्री से ,
करती है बातें घंटों
घर में बने सब्जियों की
कुछ इस तरह ,
आज क्या बनाई है
या फिर ,
आज क्या बनाएं read more >>
टूटना क्या होता है,
ये उससे पूछो,
जो घर की चार दीवारो तक ही सिमट जाती है।
उड़ान उसे भी भरनी थी,
लेकिन वो परिवार, बच्चे, घर,
इनमें ही उलझ कर read more >>
शक्ति दे हमको हे शारदा माँ ,
मन में दे विश्वास हे ज्योति माँ ,
रस्ते पे चले हम धर्म के ,
करे न कोई भूल हे जग माँ ..........
मिटा लोभ लालच की अग्न read more >>