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जब तू था तो मैं नहीं अब मैं हु तो तू नहीं अजब खेल हैं तेरा आज तू कहि और अश्क कहि कुचल दिया दामन दफ़न कर दिया यांदों को उसी जगह जहा कभी read more >>
विदाई के बाद बेटी ससुराल जाती है, नये रिश्तों को अपना बनाने के लिए माँ को भूल जाती है। कभी,ये कभी वो नित नए बहाने बनाती है।बेटी आएगी कब ? read more >>
फोन की घंटी बजी मन बेचैन हुआ, भैया से तो कल बात हुई थी आज क्या हुआ। तभी उधर से आवाज़ आई क्या कर रही है? ज्यादा कुछ नहीं भैया नाश्ते की तैय� read more >>
फोन की घंटी बजी मन बेचैन हुआ, भैया से तो कल बात हुई थी आज क्या हुआ। तभी उधर से आवाज़ आई क्या कर रही है? ज्यादा कुछ नहीं भैया नाश्ते की तैय read more >>
फोन की घंटी बजी मन बेचैन हुआ, भैया से तो कल बात हुई थी आज क्या हुआ। तभी उधर से आवाज़ आई क्या कर रही है? ज्यादा कुछ नहीं भैया नाश्ते की तैय� read more >>
हम भले ही किसी को ध्येय की दृष्टि से देखे, उस पर विश्वास करे या ना करे हम भले ही यह कहे की ये दुनियां विश्वास के काविल नही� read more >>
वो रातो को ख्वाबों में आने लगे है । मौहब्बत मेरी बो जताने लगे है। खुले जब आँखें तो बहते है आँसू मुझे मौहब्बत मे इतना सताने लगेहै।। read more >>
शीर्षक जिन्दगी और मौत मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) मौत तो यूँ ही बदनाम हैं। लोग तो जिन्दगी से परेशान हैं। जिन्दगी हर रोज़ लाती एक नय read more >>
ए जिंदगी थोड़ा धीरे धीरे चल पीछे काफी कुछ छूट गया है मुझे उसे उठाकर लाने का कुछ समय तो दे न जाने क्यों तुम इतनी तेजी के साथ मेरे हाथों से read more >>
पढ़ी-लिखी लड़की रोशनी घर की जिधर भी जाए घर को रोशन करती एक नहीं वो कितने घरो का मान बढ़ाएं मन में है लाखो राज वो उन्हें दबाये बँधी है व read more >>
एक तूम ही तो वो जिसे अपना समझ के बोलना चाहा था पर तुमने तो हुमे अपने phone से ही Block कर दिया/ read more >>
लोगो का अजीब रिश्ता है शब्द भी बोलते पर Block करने वाले/ read more >>
तू मिला होता तो रिश्ता ना टूटा सा लगता तेरे ना मिलने से अपना मन Block सा लगता / read more >>
जब तुम औरों से बोले तो तुम्हें अच्छा लगा मेरा बोलना तुम्हें इतना कड़वा लगा की अलफाज भी तुम्हारे Block शब्द में मिले / read more >>
असली दोस्त वो नहीं जो Block कर दे असली दोस्त तो वो हे जो दु:खो में दोस्त का साथ दें / read more >>
गर्मीयों का मोसम है पसीने से भीग मत जाना दो पल की जिन्दगी हे मुसाफिर तुम भूल मत जाना / read more >>
शीर्षक (गर्मी) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) मौसम का हाल ना पूछो गर्मी से है बहाल ना पूछो। ऎसी कूलर सब आन है फिर भी घर में बहोत तापमान ह read more >>
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *व्यर्थ ईच्छा* प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर.....करण सिंह 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 ➰जिस दिन हमारी मौत होती है, हमारा पै read more >>
तपिश शब्द गर्मी की पराकाष्ठा को हमारे मानस पटल पर चित्रित करने के लिए पर्याप्त है। भारतवर्ष में तपिश अप्रैल से जुलाई तक अपने उग्र रूप read more >>
जाज्वल्यमान मणि, चमचम चमक रही है। दृष्टिवंत क़िस्म, मणिमय दमक रही है। तीक्ष्ण रश्मि अंतरायण, वहीं सिमट रही है। रश्मि से रश्मि, बेमन ल� read more >>
गर्मियों के मोसम को में सहता गया पसीना शरीर से मेरे निकलता गया / कभी छांव की तलाश तो कभी पलास की तलाश में में इधर उधर भटकता गया कभी प read more >>
ए दोस्त रूठ मत जाना शब्दों को मेरे तोड़ मत जाना / में अपने गीत बेचने आऊँगा में अपने फूल बेचने आऊँगा इन्हे खरीदने भूल मत जाना ए दोस्त र read more >>
शीर्षक (बारिश का मौसम) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) चेहरे पर खुशियाँ आती है काली घटा जब बदल पर छाती है। झूम के पवन फिर गाती है , पेड़ो प� read more >>
बेचैन दिल ये मेरा जालिम, कुछ सुनने का अब नाम ना ले । बस दोष मढ़े सर औरो के, खुदपर कोई इल्ज़ाम ना ले।। चाहत तो थी की मैं बनु नेता, पर च� read more >>
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