जहां आप, अपने रहकर भी हो लुप्त।
आप ही सुस्थ, बाक़ी सब सुस्त।
जिस शिखर पर आप, अपने बहुत पीछे छूट जाएं।
चाहकर भी आपका, नजरों से नाता टूट जा� read more >>
बारिश के बाद मिट्टी की ओ सौंधी- सौंधी खुशबू
मन को आनंद विभोर कर देती है
उसमें तितली , टिड्डो का झूम के नाचना
मेंढ़कों के टर - टर कर बारिश � read more >>