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अब सब ने मुंह मोड़ ही लिया है तो अपना भी हक बनता क्यूंकि सबने जरूरत पर ही मुंह मोड़ा है। read more >>
कविता -मुलाकात चलता गया चलता रहा मिलता रहा हर लोग से, जीवन सफ़र कटता रहा मुड़ता गया हर मोड़ पे, जितने मिले जैसे मिले अपने मिलें या read more >>
रोने के लायक भी नहीं छोड़ा है लोगों ने क्योंकि उसे हम से ज्यादा हमारे चाहतों से मोहब्बत हो गईं है। read more >>
सब उठ कर धर्म का ज्ञान देने लगा है,ऐसा लगता है जैसे भगवान कुछ नही कर रहा है। read more >>
कल जो कहते थे मोहब्बत सोने नही देती,आज बही सोने के लिए नींद की गोलियां खा रहे है। read more >>
कलम को लोगों ने बेच दी है, क्योंकि अब इंसाफ कलम से नही पैसों से मिलता है। read more >>
तुम्हारा मोहब्बत वैसा हो हो गया है,जैसे गेट पर खड़ा शाहील विक्षा मांगता है। read more >>
दुखी मत होना बेटा की लोग तुम्हें पसंद नही करते क्योंकि तुम्हारा बाप तुम्हारे जैसे बेटे पर गर्व करता है। read more >>
निराश मत होना बेटा ये गलत फेमी में मत रहो की मैं ही परेशान हूं ,सब लंका में आग लगी हुई है। read more >>
दोस्ती और मोहब्बत में फर्क ही क्या रह गया है, क्योंकि दोनो से वक्त पर वफा नही मिलती। read more >>
मेरी परछाई भी मेरे से दो कदम हमेशा आघे ही रहती है,क्योंकि उसे पता है मेरी पहचान उजाले में होती है अंधेरे में नहीं। read more >>
शोहरत के लिए ही कर रहे हो न ठीक है,लेकिन मरोगे तो मिट्टी में ही सोना परेगा,सोने के प्लेट में नही। read more >>
दूसरे के बुराईयों को उछालने वाले लोग अपने ही दामन में दाग लगाए बैठे है। read more >>
चल मुसाफिर एक राह पे चल जिंदगी के एक गुमराह पे चल हर लोग है बुरे भले तुम्हें चलना है अकेले जिस राह पे अनेक कांटा है उसी राह पे जिंदग� read more >>
जहां आप, अपने रहकर भी हो लुप्त। आप ही सुस्थ, बाक़ी सब सुस्त। जिस शिखर पर आप, अपने बहुत पीछे छूट जाएं। चाहकर भी आपका, नजरों से नाता टूट जा� read more >>
शीर्षक (भोले नाथ की नगरी काशी) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) काशी का नाम ही काफी है। भोले नाथ के बिना किस काम की काशी है। भोले नाथ ही तो read more >>
आशाओं से खिली चाहतें, जो रहें कर्म से लिप्त! ये चल कर लै कर ज्ञान धरा पर, करें धरा संतृप्त!! है ज्ञान अनुठा करी गर्जना, read more >>
कविता -आंगन बांटों ना आंगन बन्धु! आज तोड़ो ना रिस्तें मधुर आज। तुलसी सी मां-ममता महके घर का कोना कोना गमके जीवन की ज्योति read more >>
बारिश के बाद मिट्टी की ओ सौंधी- सौंधी खुशबू मन को आनंद विभोर कर देती है उसमें तितली , टिड्डो का झूम के नाचना मेंढ़कों के टर - टर कर बारिश � read more >>
जरा - जरा सी बात पे हो जाए कई बात अनकही - सी ना तुम समझ पाते हो ना मैं , छोटी - सी बात समंदर की गहराई ले - लेती है। read more >>
पैसा मैने कभी भी किसी से मोहब्बत नही की लेकिन मेरी वजह से केतनो को मोहब्बत मिल गई। read more >>
पैसा मैंने कभी भी किसी से मोहब्बत नहीं की,लेकिन मैं वो तीसरा आदमी हूं जिससे लोगों को मोहब्बत और वफा दोनो दिला देता हूं। read more >>
पैसा मैने कभी भी किसी को पसंद नही किया,लेकिन लोग फिर भी मुझे ही पसंद करते है। read more >>
पैसा मैंने कभी भी किसी के लिए झूठ नहीं बोला,लेकिन लोग मेरी वजह से झूठ बोलकर अपनी पहचान खराब कर ली। read more >>
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