तू मंजिल है मैं किनारा ।
तू साथ दे या ना दे हमारा ।।
चल कहीं दूर चले ।
मंजिल के पीछे हम क्यों परे ।।
मत कर इधर उधर की बात ।
तो मंजिल कभी � read more >>
कांच के कंगूरे, कांच की दीवार।
रहने वाले कांच के, कौन करे पत्थर से वार?
इस दुनिया में कांच के, चिरक ढांस हैं घर।
रहने वालों में, अजीब -सा स read more >>
मां का प्यार
हमने तुम्हे प्यार किया अपनी जान से ज्यादा ।
तेरा दिल तोड़ने का मेरा कोई नही था इरादा ।
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सच और झूठ के दरमियाँ, मेरी ज़िंदगी उलझ कर रह गई
ताब में उन की ज़ुबाँ भी आज, जाने क्या-क्या मुझ से कह गई
— त्रिशिका श्रीवास्तव धरा, कानप� read more >>