अपराजिता घड़ी की अलार्म से हड़बड़ा कर उठती देखती 7:00 बज गई वह कहती मैं इतने देर तक सोते रही रात में मेरा बेटा संजय ने मेरी पैर की मालिश कर read more >>
कविता -दिशा
कहां जा रहे हो?
न ठौर न ठिकाना
चले जा रहे हो
कहां पर? बताना
मंजिल कहां है?
कहां पर है जाना?
दिशा वह कौन है?
किधर हो रवाना?
पथि� read more >>
ओ बीते दिनों की बातें मुझे रुलाती है बार - बार
जाने कितना सताती है बार - बार
भूल कर भूला न पाती हूं बार - बार
एक बात दिल में रह - रहकर आती है read more >>