कविता -कृष्ण बाल लीला
अब आन बसौ मोहन मन में, तेरी सूरत मन को भावत है। बचपन में तू जीवन की सबै, खूब लीला करत दिखावत है।|
ठुमकत चलत बजै पैज� read more >>
Page No.1
माँ तेरी जमी पर
कितनो ने दी अपनी बली|
ना सोच्या ना समज्या बस
दिया सात सत्य और अहिंसका|
मेरी भारत माँ है
लाखो मे एक जाहा
ना हे को� read more >>
अंजू एक बहुत ही होशियार ,समझदार और पढ़ाई में बहुत तेज थी वह जिस स्कूल में पढ़ती थी वहां बारहवीं कक्षा तक की पढ़ाई होती थी, आगे की पढ़ाई क� read more >>
क्या कसूर था उस ननी जान
छीन लिया सब कुछ......
बडा दि उस लाचार की ओर नौ महीने की प्रसव पीड़ा
क्या कसूर था उस ननी जान
नहीं जानता वह क्या धर्म.. read more >>
आते..जाते..राहों में
मैं अक्सर..देखता हूं
भीड़ का एक..मेला..!
और नज़र आता है..
हर..एक शख़्स...अकेला..!!
जिनके आंखों में....
चमकती रहती है...तनहाई read more >>