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-: नशे मे गांव 😔 कहर ढाया, मातम छाया, देखो गांव को ये क्या हो रहा, जमकर खून रगों मे जी सूख गया... आजकल के जवानों के मिल जाती बेकार जवानी, नाल� read more >>
तुम वीर हो... न मानो तो तुम कायर, तीर हो, तुम मानो तो विश्व की तस्वीर हो, तुम वीर हो  राजवीर हो... सब कुछ बिखरा है इधर उधर,कई किरदार छूटे ह� read more >>
रामायण के रावण ने तो सिर्फ सीता माता को उठाकर ले जाने की गलती की थी ! कभी उसने अपना संयम नही खोया ! फिर भी लोग उसे हरसाल दशेरे के दिन जला read more >>
लेके दिल मै क्यो ? दर्द तुम दिल्लगी से इन्कार किया ! बता! कैसे तुम ने इतना ,प्यार किया read more >>
कहाँ हो तुम, कहाँ हो तुम मैने ढूंढा तुम्हें हर कहीं पर कहीं ना मिले तुम कहाँ हो तुम, कहाँ हो तुम किसी ने कहा मंदिरो में हो तो किसी ने मस� read more >>
हुई बहस एक दिन फूल और काँटों में फूल ने कहा काँटों से मुझे देखकर लोग मुझे अपने हृदय से लगाते हैं तुझे देखकर लोग तुझे तोड़ दूर फेककर आ� read more >>
कविता:-  क़िताबों का दुर्भाग्य.. रुसवा होकर करी बड़ाई ,फिर विरह अग्नि में देह जलायी मीत गया प्रदेश, सहेलिया धुँआ सू आँख गवायी , धूल मिट्� read more >>
कविता (किस हद तक मैं तुमसे प्यार करू ) केश मेरे जटा में बदले, प्राण मेरे प्रयाण हुए, निर्मोही बनो न अनीति करो, मेरी आँखो में तेरे रूप � read more >>
कविता -(पैर कब्र मे हैं लेकिन इस प्यार  की कोई उम्र नहीं ) पैर कब्र हैं लेकिन इस प्यार  की कोई उम्र नहीं अनंत आकाश की तरह हैं, दूर तक ज� read more >>
कविता (यार मेरे ...) किस दौङ मे लग गए ना जाने दिनरात मेरे, अपनी चाहत को दुनिया की नजर खा गयी सारी, किस ख्वाब मे सिमट कर रह गए सुबह-शाम मेरे... read more >>
(कविता) बेरोजगार की आवाज .... गांव गली शहरो मे चर्चे आम हो जाए, सत्ता धारी द्वार खोले तो हम तेरे हो जाए, तुम्ही हो भाषण, तुम्ही हो ताली, त� read more >>
सत्ता... (कविता ) 1.कागज छुती न कलम उठाती,है इसे कुर्सी पर बैठे रहने की बिमारी, 2.हां...है अंधी ,गूंगी, बहरी और लंगङी,है इसे गाङी पर बैठे रहन� read more >>
कविता (आज बचा कुछ भी नही) थोङे ख्वाब ,थोङी हकीकत, थोङे सवाल, थोङे जवाब, समझने-समझाने मे गुजर गई उम्र सारी, आज बचा कुछ भी नही ।। कुछ अपने read more >>
एक समय था जो मैंने तुमसे कहा था बदल लेंगे वो सारी चीजें जो हमने सहा था एक समय था जो मैंने तुमसे कहा था शाम आज की भले ही बेजुबान हो बीते� read more >>
यह है विषमता का जाम। पी -पी पागल हो रहे, दुनिया के लोग तमाम। जो गंवार हैं, वे शुद्ध गंवारू रूप में पीते हैं। पढ़े-लिखे थोड़ा, पानी मिला ल read more >>
बचपन आज यह सोच रहा कहाँ खो गया आज वो खुद अपने को खोज रहा बस्तो के नीचे दबा हुआ सोने के समय जगा हुआ भाग दौड़ के इस समय में वो समय के पीछे खो read more >>
इक शिक्षिका जब मन के अंदर। ज्ञान की वीणा बजाती है। सच कहूं वो हमको रब के पास ले जाती है। अदब के वास्ते वो इल्म की सम्मा जलाती है जुबां � read more >>
वरिष्ठ नागरिक जीवन गति उदगार बताने, याद दिलाने, , ठहरी जिन्दगी को गति देने आया हूँ II आँखों की लुप्त हुई रौशनी को रौशनी, बंद read more >>
जैसा की हम सब जानते है। भारत अनेक धर्मों का देश होने के साथ - साथ यहाँ पर विभिन्न प्रकार के त्यौहार मनाये जाते है। और अब त्यौहारो का सि� read more >>
वो चलके आई थी, हाँ ,हाँ वो चलके आई थी , पास मेरे ...पर कुछ कह ना सकी हाँ शायद , वो कुछ कह ना क्यो , के मेरी माँ मेरे साथ मे थी ! read more >>
खामोश थे ,शब्द उसके छाई थी! उदासी ,सी पास बैठ थे! हम भी, पर उसे ,पता नहीं ! ये क्या कोई दर्द था , या दिल्लगी तब से हम भी, ये ही सोच रहे है! read more >>
मेरे पास नहीं, ये तेरा दिल तु दुनिया से कह दे ! बस ,मै तो तेरा दिवाना मुझे दिवाना ही रहने दे read more >>
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