-: नशे मे गांव 😔
कहर ढाया, मातम छाया, देखो गांव को ये क्या हो रहा,
जमकर खून रगों मे जी सूख गया... आजकल के जवानों के
मिल जाती बेकार जवानी, नाल� read more >>
तुम वीर हो...
न मानो तो तुम कायर, तीर हो,
तुम मानो तो विश्व की तस्वीर हो,
तुम वीर हो राजवीर हो...
सब कुछ बिखरा है इधर उधर,कई किरदार छूटे ह� read more >>
कविता -(पैर कब्र मे हैं लेकिन इस प्यार की कोई उम्र नहीं )
पैर कब्र हैं लेकिन इस प्यार की कोई उम्र नहीं
अनंत आकाश की तरह हैं,
दूर तक ज� read more >>
कविता (यार मेरे ...)
किस दौङ मे लग गए ना जाने दिनरात मेरे,
अपनी चाहत को दुनिया की नजर खा गयी सारी,
किस ख्वाब मे सिमट कर रह गए सुबह-शाम मेरे... read more >>
(कविता) बेरोजगार की आवाज ....
गांव गली शहरो मे चर्चे आम हो जाए,
सत्ता धारी द्वार खोले तो हम तेरे हो जाए,
तुम्ही हो भाषण, तुम्ही हो ताली,
त� read more >>
सत्ता... (कविता )
1.कागज छुती न कलम उठाती,है इसे कुर्सी पर बैठे रहने की बिमारी,
2.हां...है अंधी ,गूंगी, बहरी और लंगङी,है इसे गाङी पर बैठे रहन� read more >>
बचपन आज यह सोच रहा
कहाँ खो गया आज वो
खुद अपने को खोज रहा
बस्तो के नीचे दबा हुआ
सोने के समय जगा हुआ
भाग दौड़ के इस समय में
वो समय के पीछे खो read more >>
खामोश थे ,शब्द उसके
छाई थी! उदासी ,सी
पास बैठ थे!
हम भी,
पर उसे ,पता नहीं !
ये क्या कोई दर्द था ,
या दिल्लगी
तब से हम भी,
ये ही सोच रहे है! read more >>