में पतझड का मौसम हू तुम बारिश बन बरस जाओ
मे लिखता रहू उम्र भर , तुम कविता बन उभर आओ
भले रुठे हो शब्द मेरे, तुम यु दिल की बात समझ जाओ
मेरी ज read more >>
कल्पना करते हुए____________
प्रभु धनवंतरी जी को बुलाते हैं
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दीपावली आ गई,चलो मिलकर घर को सजाते हैं,
धन तेरस के दिन, प्रभु धनवंत� read more >>
मन के द्वार एक दीप धंरु मैं!
हृदय के तम को दूर करुं मैं!!
हो उजियारा चहूं ओर,
तन को सरावोर करुं मैं!
अटरिया के कमूरे पर दीप धरुं में
आस वि read more >>
हर कदम पे जिंदगी, रुलाती है मुझे।
ज़ख्म दे दे कर भी ये, बुलाती है मुझे।
शौक नहीं है पीने का, कुछ भी अब मुझे।
ग़म की प्याली फिर भी ये,पिलात� read more >>
जिंदगी लोगों कि परेशानी बन जाती है,
जिंदगी एक नयी आहट है,जो मौत तक ले जाती हैं|
समझदार लोग ही, अक्सर
जिंदगी के सफर को अकेला ही छोड़ जाते � read more >>
अगर झुकता नहीं चरणों में, यूं ही सर किसी के तो।
तो जाओ दर पे दाता के, झुकाना सीख जाओगे।
अगर मुस्कान लानी है, किसी के‌ चेहरे पे तुमको।
त� read more >>
मैं जब भी लिखने बैठती हूं तो यही सोचती हूं कि मैं वही लिखो जो मुझसे और मेरी सोच से जुड़ा हुआ हो जिससे मैं और मुझसे जुड़े लोग भी बहुत ही ज् read more >>