मैंमैं हर गम से जार-जार हूँ।
क्योकि खफा खुद से में आज हूँ।
खुशियाँ ही खुशियाँ है इस जहा में यहाँ।
फिर भी आज मैं उदास हूँ।
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लोग कहते है मैं कभी नहीं लड़ती,
कितना गलत कहते हैं |
हाँ मैं भी लड़ती हूँ, हर रोज़ लड़ती हूँ,
खुद से खुद के लिए
लड़ती हूँ अपने उन बेतुके विचारो read more >>
अगर कोई इंसान असमर्थ है या वो किसी कारण वश असहाय है उस पर भारी संकट आया है वो कहीं काम करने नहीं जाता है ना ही वो किसी कि मदद करता है और उस read more >>
दीपावली के अवसर पर बनवारीलाल अपने घर के ड्राईंग रूम को सजाते हुए सोच रहा था, ‘‘क्या है उसके पास? न ढंग के सोफे, न अच्छी कुर्सियां, न आल read more >>