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वो कहते है की तुम्हे कोई मुझसे अच्छा मिलेगा ना क्या करे उस अच्छे का अगर जो पसंद है वो ही नहीं मिलेगा ना और नही रोऊँगा किसी गैर से तूम्ह read more >>
हां माना औरत हूं मै समाज की बेड़ियों से बंधी नायाब शौहरत हुं,मैं तो चलो एक मुलाकात ख़ुद के साथ हो जाए, एक कोशिश ज़माने के साथ हो जाए पर उल read more >>
रुक जाओ तुम 💯💯, इम्तहान अभी जारी है, सपना पूरा होने में वक्त ⏲️अभी बाकी हैं, और डूब जा किताबों की गहराई में, भूलकर किस्मत और नसीबों के ख� read more >>
कविता -मीठी बोल बोलने से पूर्व प्यारे, बोल का तू तोल कर ले। देख लो कोयल की कूक टेरती है बोल न्यारी काग सी काली भले है ,है मनोहर बोल प्या read more >>
कविता -मीठी बोल बोलने से पूर्व प्यारे, बोल का तू तोल कर ले। देख लो कोयल की कूक टेरती है बोल न्यारी काग सी काली भले है ,है मनोहर बोल प्या read more >>
एक सुबह ईक मोड पर मुब्तला खडा हू में यहाँ पर मुन्तजीर कर रहा हू ऐ जिंदगी एक बार तू इशारा कर अल्फाज भी अब झूटे लग रहे है प्यार के लग रहा read more >>
एक सुबह ईक मोड पर मुब्तला खडा हू में यहाँ पर मुन्तजीर कर रहा हू ऐ जिंदगी एक बार तू इशारा कर अल्फाज भी अब झूटे लग रहे है प्यार के लग रहा read more >>
जिंदगी कभी इतनी छोटी सी लगती है कि पता नहीं चलता कि ये पल कब गुजर गए, अपने ही नाराज होने लगते हैं आज कल ये कैसा दिखवा है पैसा इतना बड़ा हो � read more >>
बहर:_2122,2122,2122,212 मैं चला हूं अब, सजाने फूल से तसवीर को। बदल लूंगा श्रम, कड़ा कर नीच सी तक़दीर को। तुम नगीना हो, खजाने की सजा दी हो मुझे_ खत्म � read more >>
रोके से रुकती नहीं,नजर करे दीदार। अति हर्षित तब मन हुआ,रोम रोम गुलजार।। रोके से रुकती नहीं,मेरे मधुर विचार। सबको सदा प्रकाश दे,खुशी भ read more >>
हार जीत के दाव में, फसा जगत के लोग। मन से अथक प्रयास कर,पाते सुख का भोग। जीत सुनिश्चित कर चलें,रखें सत्य का ज्ञान_ खुशियों से जीवन चले, द� read more >>
रिमझिम रिमझिम बरखा बरखे फसलों पर तो ओला बरखें। कुटिया में पानीडो़ टपके। अंबर ज्यों दही का मटका। � read more >>
रिमझिम रिमझिम बरखा बरखे फसलों पर तो ओला बरखें। कुटिया में पानीडो़ टपके। अंबर ज्यों दही का मटका। � read more >>
ज़िंदगी का पहला इम्तहान है मेरा। कर दूंगी उन लोगों को साबित जिन्हे लगता है, पढ़ना बेकार है मेरा। ना रुकूंगी, ना झुकूंगी चाहे आ जाए कित� read more >>
बगैर आब के मछली की तड़प आब क्या समझे। डाल से टूटे पत्ते की तड़प डाल क्या समझे। जो किसी गैर की मुहब्बत में अपनों को भुला दे। वह मेरे दिल � read more >>
इस कविता के माध्यम से पिता की मेहनत और उस मेहनत से परिवार ओर बच्चों की उम्मीद का एक वाकया लिखने की कोशिश कर रहा हूँ। की किस तरह एक पिता द read more >>
तर्ज़=> बंसी बजी हो मधुवन मे,जो जिया नैया मोरे बस मे लल्ला जन्म लये हो आँगन मे,देखे बिना जी नैया बस में बस मे हतो री,अब नैया मोरे बस मे� read more >>
कभी - कभी कोई सब्जी इतनी कड़वी होती है कि उसमें जितनी भी मिठास भर दो पर वो मीठी नहीं हो सकती बिल्कुल ऐसे ही कुछ रिश्ते में दूरी बड़ जाए फ� read more >>
नसीब - नसीब की बात है किसी के हिस्से में दुःख तो किसी के नसीब में सुख पर सबका नसीब एक ही कलम से लिखा जाता है वो है ईश्वर की कलम। धन्यवाद read more >>
कभी इंसान इतना अच्छा होता है कि लोग उसका इस्तेमाल करते हैं 😔😭💯💔 read more >>
👉 *इस ढोंग से क्या फायदा?* *माथे पर चन्दन पोतने से क्या फायदा? जब कि मन में बुराइयों के ढेर जमा हो रहे हैं। बाहरी बनावट से कुछ काम न सरेगा � read more >>
ऐ रिश्ते कई नाम पर हमें उलझा के रख देती है पर ये जिंदगी है कि हमें बस रुलाती ही रहती है। धन्यवाद read more >>
क्या वह भी दिन थे। बचपन था या स्वर्लोक धूप में खेले धूल में खेले मां बाप के गोद में खेले खेले साथियों के साथ में क्या वह भी दिन थे। मां read more >>
क्या वह भी दिन थे। बचपन था या स्वर्लोक धूप में खेले धूल में खेले मां बाप के गोद में खेले खेले साथियों के साथ में क्या वह भी दिन थे। मां read more >>
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