रश्मों-रिवाजों से बगावत ही सही.,
ओ नहीं मेरी पर उनसे मोहब्बत तो है.,
इश्क में हम हार भी रहे है हम जीत भी रहे है.,
ना हम दिख रहे है ना उन्हें � read more >>
रचना- जितेन्द्र शर्मा
तिथी-15/02/2023
कविता-
हे पतझड़! तेरा अभिनन्दन!
यह सन्देश है नव चेतन का, नव योवन का,
नव जीवन के पाने का।
पुष्पित और पल् read more >>
Kabhi-kabhi lgta hai zindagi itni khubsurat hai phir ek hi pal m sb bdl Jata hai jaise Mano zindagi se bdi koi sza nhi.......kbhi sb hmare liye itna zruri ho Jata hai or phir dusre hi pal hme kisi ki zrurat nhi...pal m bikhkrti pal m nikhrti ye zindagi vakai itni khubsurat bhi nhi....... read more >>
ये याद में-
रह के गुज़र रहे हैं,
तेरे ही बाट जोहते-देखते
मेरे ये दिन और रात
नैना बरस रहे हैं ये-
नैना तरस रहे हैं।
अब तो आ जा हे मीत-
मेर� read more >>
वो है तो मासूम , पर गुस्सा भी जोरों का करती है
वो है तो मासूम , पर गुस्सा भी जोरों का करती है
वो है तो मेरी , पर कहने से डरती है
उसके रूठ जा read more >>