कांटों में पला बढ़ा जीवन
संग पत्ते बीच हरे-भरे,
कली से खिल कर फूल बना,
एक चुभ जाता
जो छूता मुझे,
एक रंग भरा
संग मेरे रंगों के,
वे सरल कठो� read more >>
महंगाई का अजगर
रसोई को खा रहा है !
रसोई की थाली से स्वाद
रफ़्ता - रफ़्ता गायब हुआ जा रहा है !
महंगाई का अजगर
रसोई को खा रहा है !
पहले कोरो� read more >>
जीवन जीने का यदि हो उमंग,
दु:ख भी भर देता जीवन में रंग,
है काम कौन कर सके न नर
आलस्य त्याग चल पड़े डगर,
सांसें भर कर हिम्मत कस कर,
पथ पर चल क read more >>
काठ की नाव तू बढ़ता चल,
दो चार पथिक ले अपने संग,
जिसका न अपना मंजिल पथ,
फैला सागर का गहरा जल
बने रुकावट लहरें हर पल |
काठ की नाव तू बढ़ता च read more >>
काठ की नाव तू बढ़ता चल,
दो चार पथिक ले अपने संग,
जिसका न अपना मंजिल पथ,
फैला सागर का गहरा जल
बने रुकावट लहरें हर पल |
काठ की नाव तू बढ़ता च read more >>
मुखड़ा- एकही हा बात के भाई बावे हमके खेद जी,
प्यार में काहे लोगवा करेला भेद जी,
केहू चाहे दिल ता केहू चाहे छेद जी,
प्यार में काहे लोगवा कर� read more >>
हमारे मन में अक्षर यह सवाल बार - बार उठता रहता है और अपने आप से पूछते रहते हैं कि हम क्या लिखे और कैसे लिखे ? लिखना कहा से आरंभ करें और कहा � read more >>
देश आजाद करवाया था गांधी जी ने, सीने पर गोली खाई थी,
उनको नमन प्रणाम ऐसे थे देशभक्त,
अपनी वीरता से अंग्रेजों को मात दी थी।
Happy Gandhi jayanti read more >>