#बहर:_2122
#काफिया:_जल/चल
#रदीफ:_रहा है।
#मिसरा:_दीप सा मन,
जल रहा है।
ताप सब घर,
जल रहा है।
कर्म ही तो,
फल रहा है।
प्रेम ही अब,
हल रहा है।
नाम read more >>
#बहर:_2122
#काफिया:_जल/चल
#रदीफ:_रहा है।
#मिसरा:_दीप सा मन,
जल रहा है।
ताप सब घर,
जल रहा है।
कर्म ही तो,
फल रहा है।
प्रेम ही अब,
हल रहा है।
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घर पहुँचते ही बेशक माँ से ......
कुछ काम ना हो लेकिन.....
हमारा पहला सवाल यही .....
होता है माँ किधर है और......
माँ के दिखाई देते ही.....
� read more >>
लक्ष्य...
'दुनिया जीतने' निकले हो.......
और 'एक हार' से हताश हो......
कर बैठ गए, तुम्ही ही बताओ.......
महज़ एक प्रयास में मेहनत........
रंग ला read more >>
मैं तो तेरे प्यार में कवि बन गया ,
मैं चांद भी न था रवि बन गया ,
तेरी याद में देखा जब_ जब आइना हमने ____
मेरा बदल के चेहरा तेरी छवि बन गया । read more >>
बैल और किसान...
हल खींचते समय यदि कोई बैल गोबर या मूत्र करने की स्थिति में होता था तो किसान कुछ देर के लिए हल चलाना बन्द करके बैल के मल - म� read more >>
वो कत्थई आंखों वाली कौन है। सुना है बड़ा ही सुरूर रखती है
और लहजे में वो अपने नज़ाकत का शऊर रखती है।
मान बैठी है बो खुद को हुस्न - ए- सीर� read more >>
*संजना - एक अनोखी दास्तान,*
"कहाँ जा रही है, संजना बहू... ?" बाईक की चाबी उठाती हुई संजना से सास ने पूछा...
"माँ की तरफ जा रही थी मम्मी"
"अभी तरस� read more >>