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चलो मैं भी बुद्ध बन जाता हूं-सांसारिकता का त्याग कर
विचारों का मंथन कर, आत्म को प्रसन्न कर चलो मैं भी शुद्ध बन जाता हूं। सांसारिकता का त्याग कर, ईर्ष्या द्वेष त्यागकर मोह- माया छोड़कर, फि
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ए जिन्दगी-तूने जो भी दिया मैंने सहर्ष स्वीकार किया
ए जिन्दगी! तूने जो भी दिया मैंने सहर्ष स्वीकार किया, आशाओं से परिपूर्ण था हृदय पर तूने इसे निराधार किया, आंखों में थे छलके आंसू फिर भी �
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प्राइवेट शिक्षिका की दशा- महिलाओं को शिक्षिका की जॉब लगती थी इतनी प्यारी
क्यों हम महिलाओं को शिक्षिका की जॉब लगती थी इतनी प्यारी,🧑🏫 क्योंकि आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ घर परिवार की भी जिम्मेदारी, पर अब- कभी
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सुख दुख की जीवन गाथा-कैसे ये पार उठाता
सुख दुख की जीवन गाथा कैसे ये पार उठाता मेरे पलकों का सावन बिन बात बरस जाता। आते हो जीवन बसन्त तुम निश्छल, मदमाता गाते ये पथरायीं प्य�
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जीवन मे कठिनाई का सामना करना
जीवन में कठिनाइयों का सामना करना हमारी प्रतिभा, संघर्षशीलता और सामर्थ्य को परीक्षण करता है। यह हमें अपनी सीमाओं को पार करने के लिए प्�
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दोस्ती एक अनमोल रिश्ता है
दोस्ती, एक अनमोल रिश्ता है यह दिल की गहराइयों का अद्भुत संगम है जब मुसीबतें हमें घेरे, तब यारों का सहारा है दोस्ती, एक अनमोल रिश्ता है
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मंजिल नजर नहीं आती- फिर भी न जाने क्यूं
न ही हौंसले कम हुए और न ही हिम्मत टूटी फिर भी न जाने क्यूं मंजिल नजर नहीं आती है।
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मंजिलों के कदम-मंजिलों के भी कब से कदम आ गए
न जाने मंजिलों के भी कब से कदम आ गए हम जितना करीब जाने की कोशिश करते है वो और भी आगे चली जाती है।
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सलीका-तेरे सलीके का कुछ ऐसा असर हुआ
तेरे सलीके का कुछ ऐसा असर हुआ है ये कि तेरे नजदीक होकर भी बहुत दूर चले गए है हम।।
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स्वाभिमान-कुचलकर बार बार स्वाभिमान को मेरे कहते है कि चुप रहना
कुचलकर बार बार स्वाभिमान को मेरे वो कहते है कि चुप रहना औरत की समझदारी होती है।
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वर्किंग वुमन या फिर टिपिकल इंडियन वुमन-सोच की वजह से हमारे परिवार हमारे रिश्ते बच्चे रहते हैं
हम भारतीय महिलाओं के सामने जब कोई ऐसी परिस्थिति आती है जब उन्हें अपने बच्चे और अपने करियर के पीक में से किसी एक को चुनना होता है तो हम अ�
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झूठे हंसते चेहरे-मुस्कानों पर भी जहां पहरे हैं
मुस्कानों पर भी जहां पहरे हैं हम ऐसे घर में ठहरे हैं, रूठी है जहां हर पल खुशियां वहां कैसे स्वप्न सुनहरे हैं, फीका है जहां हर खुशी का र�
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गुब्बारेवाला-गुब्बारे बेचने आया
लाल,नीला, हरा और पीला गुब्बारे बेचने आया गुब्बारेवाला। गली_गली घूमता है, गुब्बारे ले लो यही बोलता है। तब उसकी आवाज सुनकर बच्चे आए दरव
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हमारी अधूरी प्रेम कहानी-जो पूरी ना हो सकी
जो पूरी ना हो सकी वह है हमारी अधूरी कहानी। जो इश्क़ की रंगों में ना रंग सकी वह है हमारी अधूरी कहानी। हमारी अधूरी कहानी, जिसमें प्रेम �
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मिलता सुख है सर्वदा-अमर रहेगा नाम
कुंडलिया छंद साथी बनें विकास का,अद्भुत है यह काम। मिलता सुख है सर्वदा,अमर रहेगा नाम।। अमर रहेगा नाम,जन्म भी सफल रहेगा। मरने के भी बाद
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करो प्रेम सब देश से-आपस में हो प्यार
कुंडलिया छंद मेरे मन की पीर को,समझो मेरे यार। करो प्रेम सब देश से,आपस में हो प्यार।। आपस में हो प्यार,वतन पे हम हैं मरते। बनूं धार तलव�
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कण कण में श्री हरि रहे- अपने दिल में खोज
कुंडलिया छंद सब लीला भगवान की,भजन करूं हर रोज। कण कण में श्री हरि रहे, अपने दिल में खोज। अपने दिल में खोज,धाम है प्रभु का मिलता। मन में
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शिक्षा का सम्मान कर-देंगें दृढ़ परिणाम
कुंडलिया छंद शिक्षा का सम्मान कर, देंगें दृढ़ परिणाम। करें देश को सबल सब, होत जगत में नाम।। होत जगत में नाम,सदा गौरव में भारत। घर घर शि
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भाग्य का हुआ सवेरा-कर्म करूं कमनीय
कुंडलिया छंद दोहा में परिचय लिखें, बहुत खूब यह काम। सरल नाम संदीप है, रहूं देवड़ा गाम।। रहूं देवड़ा गाम,धर्म ही पूजा मेरा। कर्म करूं �
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उपजा मन अनुराग से-सबसे बढ़ा लगाव
कुंडलिया छंद होली की अति है खुशी,भागा अशुभ दुराव। उपजा मन अनुराग से,सबसे बढ़ा लगाव।। सबसे बढ़ा लगाव,भूल कर पिछली कटुता। संगी दुश्मन �
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एक अनजान नेह-बाँध रखता है सबको
कुंडलिया छंद देता जो है ताजगी,सुन्दर रखता देह। तेरे मेरे बीच में,एक अनजान नेह।। एक अनजान नेह,बाँध रखता है सबको। धरा लगे तब स्वर्ग,कभी
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कितने घातक हो गए-लगा रखें हैं खोल
कुंडलिया छंद दुविधा में रहते सभी, करते रहते मोल। कितने घातक हो गए,लगा रखें हैं खोल।। लगा रखें हैं खोल,बने फिरते हैं नेता। करते हैं गु�
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आया मन आनंद में-खुद पर अब है नाज
कुंडलिया छंद आया मन आनंद में,खुद पर अब है नाज। बिन मौसम बरसात से, रसिया हुआ मिजाज।। रसिया हुआ मिजाज,हुआ फूलों सा जनता। सुरभित हुआ समा�
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सांवरे से दिल लगाओ-भव से तार देगा वो
दुनिया से दिल क्या लगाना, सांवरे से दिल लगाना, ना करेगा वो वेवफाई, भव से तार देगा वो।
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