उसका नाम विनोद था, सारी जिम्मेदारियां,
उसके कंधों पर था,
वह प्रतिदिन अपने पिता के लिए, शराब लाने के लिए, जाया करता था, उसी शराब के कारण, � read more >>
हाये बेचारी अबला नारी,
दहेज प्रथा की कैसी ये बीमारी,
ना मान मिला ना सम्मान मिला,
रोती आ रही है नारी,
आंखों में भरकर नीर,
सब सहती आ रही है � read more >>
ना किसी के आने की
उम्मीद है मुझे....!
और ना किसी के जाने का
गम रखता हूं....!
मैं..ख़ुद..मैं..ख़ुद का
मुसाफ़िर..हूं....!
तभी नजदीकियां
कम रखता हू read more >>
प्रथम अंक
हम उन दिनों की बात करता हु कि जब मै , नारण लाल , कालूराम, जितेद्र सिंह और अरविन्द जैन आदि एक छोटे से विद्यालय में पढ़ने जा रहे हो read more >>
हमारा मन अनंत है, और मन के कोने में, हम जिस विचारों को धारण करते हैं, जैसे कोई आधी बातें लिखकर, राइटर उसे
पूरा करना चाहता है, समस्त रचना म read more >>
हां मैं कभी थकता नहीं मैं कभी रुकता नहीं, क्योंकि मैंने अपनी पत्नी से-- वादा किया है उसे हर खुशियां दूंगा,- हां मैंने वादा किया है_ कि उसे � read more >>
जिंदगी के पन्ने पलटते चले गए
आग के दरिया में धंसते चले गए,
किस्मत ने बार-बार चोट की,
फिर भी संभलते चले गए,
तक़दीर ने ऐसा मारा,
सब सहन करत� read more >>
ये जमाने के लोग सुन लो जरा,
दिल ना दुखाना किसी का मान
लो जरा, दया ही धर्म है,
क्षमा से बड़ा नहीं है दान,
किसी के आंशु पोंछ कर,
उसे हंसा सको read more >>