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बेटी बेटी हूं मैं इसलिए पराई हूं। एक बार सोचो जरा, एक बार सोचो जरा मैं क्या हुआ जो पराई हूं। मैं आप ही के अंश से आई हूं। क्यों दिया जन्म read more >>
बचपन का साथी बचपन का साथी कब राहों में खो गया, यह पता चला ही नही। मैं बच्चा से कब बड़ा हो गया ये पता चला ही नहीं। बचपन के वो लम्हे जो हर स� read more >>
जिंदगी एक तन्हाई तन्हाई के उन पलों को मैं कैसे भूल जाऊं। जो मुझे अपनों के साथ रहते हुए भी अपनापन नहीं। मैं अपनों को अपनाते अपनाते हैं read more >>
शक्ति की पूजा मैं अर्ध शतक नारीश्वर हूं, नारी के मन का ईश्वर हूं। जो मन नारीश्वर हो न सका, वह कभी शक्ति को अभिभूत कर न सका। नारी तो शक्त read more >>
कभी सच्चे दिल से चाहा था किसी को मगर उसने सिखा दिया कि; यहां ना सच्चे दिल का कोई मोल है ना सच्चे चाहने वालों का read more >>
शम्भू की संतान है, आदिशक्ति का जाया है जन-जन का विघ्न हरने, विघ्नहर्ता आया है - त्रिशिका श्रीवास्तव ‘धरा’ read more >>
तेरा मासूम सा रूप देख के, मेरा दिल मचल सा गया है । तेरी मासूम सी सूरत ने तो मेरे दिल का कत्ल कर डाला है । कैसे करू तेरी सुंदरता के चर्चे , read more >>
कितने अच्छे थे वे दिन जीते थे चिंता के बिन.. खूब पढ़ना, खूब लिखना मौज मस्ती, गिन -गिन -गिन चलते फिरते थे बिंदास रखते दिल में बड़ी सी आस अ� read more >>
नौ से दस सितंबर के बीच नई दिल्ली में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन कई मायने में ऐतिहासिक व अभूतपूर्व रहा। इसमें उन तमाम विषयों पर (73 बिंदुओं � read more >>
छुट्टी का दिन था। बारिश हो रही थी। भीगे बिना नज़ारों के मजे लेने का मन हुआ। सोचा लॉन्ग ड्राइव पर चलूं। कार निकाली और घूमने निकल गया। मं� read more >>
सुबह मुझे व्हाट्सएप पर मेरे कलीग राकेश भाई ने मेसेज किया की एक साइट पर जाना है मेजरमेंट चेक करने। मैं रास्ते में राकेश भाई का इंतजार क� read more >>
उल्टी चप्पल कहें या उल्टा जूता दोनों ही हमारी बचपन की यादों से जुड़ी हुई हैं. बचपन में अक्सर मैं दाहिने पैर की चप्पल बाएँ में और बाएँ पै read more >>
कहानी के शीर्षक से यह मालूम होता है कि इसमें कामचोर और हौसला दो शब्द हैं. पहला शब्द है कामचोर जिसका मतलब होता है काम ना करना चाहने वाला, read more >>
रामचरितमानस में तुलसीदास ने कहा है - होइहे सोई जो राम रचि राखा. को करि तर्क बढ़ावै साखा. भावार्थ ये है कि जो कुछ राम ने रच रखा है, वही होगा read more >>
रूपेश हमेशा किसी असमंजस में रहता था. उसकी पत्नी सुलेखा उसकी असमंजस को समझ नहीं पाती थी. पूछने पर ना बताना रूपेश की एक बुरी आदत थी. सुलेख� read more >>
यह कहानी उन दो लड़कों की है जिन्हें सब टपोरी कहा करते थे. जिनका नाम था आफताब और फैजान. दोनों को लोग टपोरी इसलिए कहते थे क्योंकि उनके ऐसे read more >>
वो जब पैदा हुई थी तो उसके पिता ने मिठाई बांटी थी. एक मैकेनिक के घर नन्ही परी ने जन्म लिया था. माँ की लाडली और पिता की दुलारी लाड-प्यार में � read more >>
ये कहानी है प्यार के बलिदान की. दो प्यार करने वाले पंछी अपने माँ-बाप के लिए अपने प्यार को बलि चढ़ा देते हैं. अपने प्यार को अपने दिल में दफ read more >>
आफताब एक होनहार 16 साल का लड़का जो कि 12 वीं की पढ़ाई कर के अपनी बुआ के घर छुट्टियां बिताने गया हुआ था. अप्रैल का महीना था. गर्मी अपने चरम पर read more >>
कहानी के शीर्षक से स्पष्ट नहीं हो रहा होगा कि नाश्ता और पानी पर कैसी कहानी होगी लेकिन है बहुत ही रोमांचक कहानी. कहानी से पहले नाश्ता- पा read more >>
ये कहानी उस लड़के की है जिसे अपनी ज़िन्दगी में भविष्य का डर हुआ था. शीर्षक से तो आप सभी असमंजस मे होंगे कि भविष्य का डर से लेखक का क्या अभ read more >>
सतीश बचपन से बहुत सीधा लड़का था. माँ - बाप के संस्कार उसके व्यवहार और व्यक्तित्व मे झलकते थे. उसे सिखाया गया था कि हमें कभी किसी से झूठ नह read more >>
वफादारी के बारे में सभी जानते हैं कि वफादारी क्या चीज़ है. लेकिन फिर भी बता देना चाहता हूँ कि वफादारी वो हुनर है जिससे दुनिया जीती जा सक read more >>
वर्षा अपनी सहपाठी अंजली के साथ मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में रहती थी और साथ में ही पढ़ाई किया करती थी. रात को दोनों का खाना बनाने का विचार � read more >>
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