(दोहा छंद)
आदत से मजबूर जो, उस पर चढ़े न रंग।
वो अपना ही चाल चल, करे काम को भंग।।
आदत से मजबूर जो,सोचे कभी न खास।
थोड़े में झूमे सदा,करके द� read more >>
एक लड़की रोज शाम को 5:30 बजे पार्क में आकर वहीं एक बेंच पर बैठ जाती और उसके ठीक 10मिनट बाद एक लड़का भी उसी के पास आकर बैठ जाता
वहां से दो बेंच read more >>
चलो आज उसकी कहानी सुनाता हूँ जिसे मैं प्यार से सखी बुलाता हूँ. आई थी मेरी जिंदगी में कुछ 5 साल पहले लगती थी दिखाने में मेरे बिना जो रह ले, � read more >>
जिस समस्या का ना हो हल, उसके बारे में सोचना है पागलपन, ऐसी समस्या अपने सामने खुद खड़ी करता है बे अक्ल।
ऐसी समस्या का भी हो सकता है हल, अग� read more >>
एक बार मैंने " किस्मत और वक्त " दोनों से पूछा :
" तुम दोनों ही मेरे साथ यह अन्याय क्यों कर रहे हो , मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है , जो तुम म� read more >>