प्रेम बाग-ए-कली तू ,
कैसी-ए-लाड़ली तू ,
प्यार दिया मुझको अपनाया ,,
अपनों का अनाथ मैं ..!!
मेरा ए-प्रेरणा तू ,
राह एक सहारा तू ,
बन जीवन में ए-� read more >>
समझते हैं लोग क्यों-
हम अलग हैं आपसे,
समझते हैं लोग क्यों...
जीवन की चाह दिया-
चाहो जी भर के,
जियो जी भर के...
समझते हैं लोग क्यों-
हम अलग ह read more >>
सुःख हो या दुःख सब तुझपे है छोडा
दुनिया को छोड़ के नाता है तुमसे जोड़ा,
ओ माई मेरी छोड ना देना मुझे बिच राह में जीवन के हर इक पल को तेरे भरो� read more >>
नफरत भरी उचाँइयों पर, कभी मोहब्बत की सीड़ी लगाकर, आज़गी भरे कदमों से धीरे - धीरे चाहत लिए उपर चढ़ कर, मुस्कुराकर उस पार झाक कर तो देखो, ताज़ी ह� read more >>
अपनाने लगे है।
बदलते . रीति - रिवाज़
शौक .
बदल के जीना क्या... ?
यहाँ
खुद ब खुद बदल गए
सब, तौर तरीक़े
अब,किसी से शर्माना क्या....?
मत ढकिऐ,
ओ� read more >>