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तालियाँ इस समय विद्यालय में गणतन्त्र दिवस समारोह के लिए सभी बच्चे और शिक्षक बड़े जोर-शोर से तैयारी में लगे थे। घर जाकर सभी अपने-अपने � read more >>
शुभ प्रभात कितना अपनापन लिए लगती थी प्रातः काल की वह बेला, जब सूर्योदय से पूर्व ही नित्य मेहरू का सुदूर गाँव से शुभ प्रभात सन्� read more >>
पढ़ लेती है मेरे मुख को, सुन लेती है मौन दुख को, रूठे रूठे से सुख को, मना मना कर लाती है... जाने कहां से 'मां' हुनर लाती है...! read more >>
फ़िसलती ही चली गई, एक पल, रुकी भी नहीं; अब जा के महसूस हुआ, रेत के जैसी है ज़िंदगी। read more >>
उद्धेग, उद्दंड, उच्छृंखल, उचित -अनुचित। कब ऋजु, कब गरब गहेला, कब तीव्र उत्तेजित। कब दृढ़निश्चयी, कब दिग् भ्रमित। कब रिस, कब उद्धर्ष, कब read more >>
समझो, कुतरत का ये ईशारा, रोको ,ना खुद को, बहने दो , है । ये प्रेम की घारा जो सामने आया है। वो मिलेगा जीवन मे दोबारा ये जीवन सरस,, .......अमृत ह� read more >>
बजट एक नजर में.. आजादी के पहले भारत में पहला केंद्रीय बजट 7अप्रैल 1860 में ईस्ट इंडिया कंपनी के स्कॉटिश इकोनॉमिक्स और पॉलिटीशियन जेम्स व� read more >>
यह मोहब्बत है ठगों की बस्ती, एक पल में बदल देती है हस्ती; आशिक़ रहते है इश्क़ में बैचेन, इश्क़ जाता है उजाड़ कर बस्ती...! read more >>
Ek aisa samay, jo jeevan me khamoshi Lata h,apne bacchon ki parbaris me ma bap apna sab kuch kurban kar dete h, khud ke liye jeena bhul jate h, bacchon ki khushiyon me khush hote h or unke gum me duhki, Aj jab bacche bde ho gye,to chidiya ke bacchon ke bacchon ki tarah asman me ud gye, Or humne jindagi jaha se suru ki thi bahi par pahuch gye, Ja read more >>
आशा आँसू पोंछती,देती है उत्साह। निर्बल को करती सबल, करे सरल नित राह।। आशा आँसू पोंछती,भरती साहस खास। नव्य भाव को यह जगा, सदा बुझाती प्� read more >>
चाहतें भी नफ़रतें भी क्या ये झमेला है। ज़िन्दगी बस चार दिन का ही तो मेला है।। मुश्किलों में साथ देता कौन अब किसके। हर कदम पर शख़्स वो ख़ुद � read more >>
किस किस से जाकर कहती ख़ामोशी का राज, अपने अंदर ही ढूंढ रही हूँ अपनी ही आवाज। -दिनेश कुमार कीर read more >>
प्रेम ( पति - पत्नी का )  एक साहूकार जी थे उनके घर में एक गरीब आदमी काम करता था । जिसका नाम था । मोहन लाल जैसे ही मोहन लाल के फ़ोन की घंटी बजी read more >>
कविता आगाज ए सरहिंद धीर हू,अधीर हूं, पीर हूं,शांति का मीर हूं, आन हूं,भान हूं,शान हूं,हिंद की कमान हूं ना शोर हूं,ना अघोर हूं,मै� read more >>
पागल है जिंदगी और मस्ताना ख्वाहिशात हम तो मुसाफिर है अपने मंजिल के डगर की क्या बात रुकना नहीं है बस चलना है कंकड़ हो या फूल सबसे म� read more >>
हर तकलीफ को हंस के सहले जो, तेरी खुशियों में खुश हो जाए. सॉरी दुनिया की खुशियां दे, शौक तेरे जो पूरे कर जाए. पैर तेरे जब डगमगाए, तुझे सही � read more >>
एक बार तूझे मन्दिर मे आना होगा । बनी रहे ,आस्था मेरी, मन मे विश्वास जगाना होगा। । मेरी टुटती ऊमीदो का तु किनारा तो बन देख रहा हूँ तेर� read more >>
जिसने तुझे पुजा है। तेरे इस मन्दिर मे वही बैठा है। आज तेरी चोखट पे , रूठी किस्मत, हाय , रुठी अम्बे माँ कर्म से कुछ � read more >>
मैं कौन हूं ? था मैं ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना, रहा मैं, सब में विशेष, बन सबका मुखिया इन्हीं गुणों के बल पर, करता गया दर्प मन में मैं, कह� read more >>
सत्य ,शक्ति शिव की भक्ति और बतेरे काम हे। संसार मे क्यों उलझ गया रे मनसा यों झुठे माया जाल मे ...... अब रट... शिवम् ॐ .....शिवम् read more >>
मैं, तू मजबूर, मजबूर सारी दुनिया। लिया -दिया हो जाता, दिया- लिया। दिग्गज के दिन दरकते, लुढ़कता हाशिया। समझ से परे, ईश्वर की ग़ज़ब गुनिय read more >>
"गम" "इस जहान में गम न होता तो,शराबें महखानों का क्या होता,बोतलें खाली होती,हाथों में जाम न होता,लबों पर उनका नाम न होता,निगाहों में उनके � read more >>
ज़िदंगी को हमेशा खुल कर और जितना हो सके खुश होकर जियो, नहीं पता जो आज है वो कल हो ना हो। -दिनेश कुमार कीर read more >>
मैं बिकने तक को राजी था उसके प्यार के बाजार में नजरें लड़ने तक की तो आस थी ही पर कमवख्त उसने नजर तक नहीं फैरी शायद उसे नहीं खबर कि हमेश read more >>
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