आज के समय में हर व्यक्ति के मित्र होते है, आधुनिकता के इस दौर में पुरुष की महिला व महिला के पुरुष भी मित्र होते है। मिथुन अनुरागी की यह क� read more >>
हे SAKURA
तुम्हें क्य़ा लगता हैं कि तुम्हारी छोटी से छोटी या ,बड़ी से बड़ी गलती को क्या मर्द भुला सकता है ?
मुझसे पूछो तो कभी नहीं ..भले ही वो read more >>
गढ़ की मान बचावन की खातिर,
सिर कटा लेगा देश को वीर,
अंगारों पर भी हसते हसते चल लेगा,
मारे गढ़ री तो एक ही शान |
मुछ नहीं रखी मर्द कैसा,
यह � read more >>
यह सवाल कही ना कहीं हम सब से जुड़े है
(1) ना जाने समय के साथ बच्चों को अपने माता -पिता बोझ क्यों लगने लगते है जिस माँ ने हमें जन्म दिया आज उ read more >>
जब कोई इंसान जीवन कि असल सचाई जान लेता या में कहूँ पूर्ण रूप से अपने आपको जान लेता है। और सचाई के मार्ग पर चलता है तो कुछ लोगों को यह बात � read more >>
ऐ जीवन के थके मुसाफिर,
बढ़ चल मंजिल अब दूर नहीं ।
कर्म करे फल ना पाये,
ये प्रकृति का दस्तूर नहीं ॥
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ऐ जीवन के थके मुसाफिर,
बढ़ चल मंजिल अब दूर नहीं ।
कर्म करे फल ना पाये,
ये प्रकृति का दस्तूर नहीं ॥
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है बेबसी में लिपटी, मेरी ये जिंदगी है ।
आंखों में अश्रुजल फिर भी, होठों पे मेरे हंसी है।।
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अंधेरों read more >>
अरमान जो था मेरा, अरमान रह गया ।
खाली था मेरा खाली, ये मकान रह गया ।।
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फूलों सा खिलखिलाता, था प्या read more >>
मर्यादा सम्मान मान,
ये सब कुछ कुचल रही है
ये इक्कीसवीं सदी चल रही है
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एक पिता बच्चों की खातिर
सारे दुखड़े झेले read more >>