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सरसर तरणी तैरती, गहरी झील के सीने पर। गद्गद मद के गद के गद से, खुद के किश्ती होने पर। मुझे सरूर, इसका टूटा ग़रूर, विवश जीवन जीने पर। ए� read more >>
गुरु ग्रंथ है उस ज्ञान का, किताब जिसको ना चाहिए। गुरु संत है उस शाम का, शिव भी जिनको शीश झुकाए। गुरु इतिहास है उस देश का, जिसे आज हम ग� read more >>
उठो चलो अब दाव दो, ये शंकनाद हो चला, ये सूर्य भी है बोलता, ऐसे जीतोगें कैसे भला ??? खिली धूप इस दोपहरी की, अब सूरज सिर पर आ गया, उठो चलो दौड� read more >>
घट्ट मिठीत बांधते हे चांदणे, चंद्रा घरी नांदते विना स्वप्नांचे, डोळे जणू दिसे वांझटे. चंद्राच्या स्पर्शात उजळते संध्या, तुझ्या आठव read more >>
गरीबी का दामन संभाले खड़े हैं, सपने तो ऊँचे हैं, पर टूटे पड़े हैं। रौशनी जिस शहर में बिकने लगी है, वहीं कुछ चूल्हे अब तक बुझने पड़े हैं। read more >>
ग़रीबी ने हमसे वो ख्वाब छीने है जो बचपन में आंखों ने मेरे देखे थे हर मोड़ पर तक़दीर ने ठोकर दी, जो सपने थे, मेरे वो भी अब बिखरे पड़े है प� read more >>
तेरी यादों का साया अब भी मेरे साथ है, हर लम्हा बस तेरा एहसास है। चाहा भुलाना तुझे इन रातों की तरह, पर दिल में तू ज्यों कोई जज़्बात है। ह� read more >>
गांव की गलियों में अब भी तेरी याद बसती है, मिट्टी की खुशबू में तेरी ही बात महकती हैं। बरगद के पेड़ तले जो साथ बैठते थे कभी हम अब भी वो ठं read more >>
ढलती उम्र का हर मंजर नया सा है, कल जो जवां था, आज तनहा सा है। आँखों में अब भी ख्वाब जिंदा हैं, पर पलकों पर बोझ थोड़ा ज्यादा सा है। कदम जो क� read more >>
हमारी शायरी तो अब भी जवाँ लगती है, हर अल्फ़ाज़ में एक नई दास्तान लगती है। उमर भले ही ढलती जाए धीरे-धीरे, पर एहसास की रोशनी अब भी जवान लगत read more >>
जरूरत पड़ी तो धूप नहीं तो छांव में रहे बेगैरत हैं वो लोग जो दो नाव में रहे हमने तो सौंप दी दिल की सल्तनत उन्हें अफसोस कि वो फिर भी चुन� read more >>
बताओ कौनसी किताब लिखूं सितारों की महफिल में सबसे अलग लगाती हो तुम आंखों में लगी काजल और खुले बाल में लाजवाब लगती हो तुम बताओ तुम पर क� read more >>
समर्पण और मेहनत: सफलता की कुंजी हर व्यक्ति के जीवन में एक ऐसा क्षेत्र होता है जिसमें वह आगे बढ़ना चाहता है, लेकिन सफलता उन्हीं को मिलती read more >>
हर रोज़ निगाहों में कुछ नमी सी लगती है ज़मीं अपनी ख़ुदा अपना फिर भी कमी सी लगती है ...... ALI Poetry read more >>
टहनियों के बीच से झांकता परिंदा, बाहर के माहौल को भांपता परिंदा, घोसले के मोह से न जागता परिंदा, पर भूख के पीछे भीतर भागता परिंदा। ज्य read more >>
रे मनुष्य हो सावधान! वन्य जीवों का करो सम्मान !! मानवता हेतु शर्म की घड़ी है प्रश्नों संग पशु दुनिया खड़ी है काट डाले आश्रय वन सारे न� read more >>
शक्ति के प्रेम में शिव भी बदल गए थे, वैरागी से किसी के हमसफ़र बन गए थे। जो ध्यान में लीन, विरक्त थे सदा, प्रेम के स्पर्श से शक्ति के हो गए read more >>
नील गगन के नीचे, जलधारा के बीच, एक नाव चली, बहती रीतम - रीत। नाव की देहरी पर बैठी कोई, मानो स्वप्नों से आई जलपरी। नयनों में गहराई, लहरों-� read more >>
न पाना था, न ही खोना... प्रेम में मैंने जाना कि प्रेम का अर्थ है — होना। न अपेक्षा, न अधिकार, बस एक मौन स्वीकार। न कोई सीमा, न कोई बंधन, बस � read more >>
घाट का एक ख़ामोश पत्थर हूँ मैं, मैंने नदी के हज़ार नखरे देखे हैं… कभी लहरों की हल्की छुवन, तो कभी बाढ़ के ग़ुस्से देखे हैं… कभी किसी न� read more >>
*"वक़्त की स्याही में लिपटी ज़िंदगी"* किसी ने आज हंसकर पूछा, "कौन है वो.?" हम भी मुस्कुराए, मगर जवाब यूँ दिया— "किसी के कानों की बाली में जड़� read more >>
प्रेम में अंत होता है प्रेम अनंत भी होता है प्रेम में शब्द होता है प्रेम निशब्द भी होता है प्रेम में अभिव्यक्ति होती है प्रेम read more >>
होली यारों मैं क्यों खेलूं सब पर फरेब मुखोंटे हे | किसी के दिल में केसे बसु में सब के दिल बहुत छोटे हैं || इस रंग बदलती दुनियां में एक र� read more >>
हरियाली संग संवत्सर बिते फागुन मास संन्यास के पतझड़ के बाद जंगल दहक रहा जब खिले फूल पलाश के जब वन-उपवन सुखें हो जल की हो सबमे अमिट प्यास read more >>
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