उठो चलो अब दाव दो,
ये शंकनाद हो चला,
ये सूर्य भी है बोलता,
ऐसे जीतोगें कैसे भला ???
खिली धूप इस दोपहरी की,
अब सूरज सिर पर आ गया,
उठो चलो दौड� read more >>
ग़रीबी ने हमसे वो ख्वाब छीने है
जो बचपन में आंखों ने मेरे देखे थे
हर मोड़ पर तक़दीर ने ठोकर दी,
जो सपने थे, मेरे वो भी अब बिखरे पड़े है
प� read more >>
ढलती उम्र का हर मंजर नया सा है,
कल जो जवां था, आज तनहा सा है।
आँखों में अब भी ख्वाब जिंदा हैं,
पर पलकों पर बोझ थोड़ा ज्यादा सा है।
कदम जो क� read more >>
शक्ति के प्रेम में शिव भी बदल गए थे,
वैरागी से किसी के हमसफ़र बन गए थे।
जो ध्यान में लीन, विरक्त थे सदा,
प्रेम के स्पर्श से शक्ति के हो गए read more >>
नील गगन के नीचे, जलधारा के बीच,
एक नाव चली, बहती रीतम - रीत।
नाव की देहरी पर बैठी कोई,
मानो स्वप्नों से आई जलपरी।
नयनों में गहराई, लहरों-� read more >>
न पाना था,
न ही खोना...
प्रेम में मैंने जाना
कि प्रेम का अर्थ है — होना।
न अपेक्षा, न अधिकार,
बस एक मौन स्वीकार।
न कोई सीमा, न कोई बंधन,
बस � read more >>
*"वक़्त की स्याही में लिपटी ज़िंदगी"*
किसी ने आज हंसकर पूछा, "कौन है वो.?"
हम भी मुस्कुराए, मगर जवाब यूँ दिया—
"किसी के कानों की बाली में जड़� read more >>