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पतझड़ के बाद बहार आता है, रात के बाद दिन आता है। नाकामयाबी से परेशान ना हो बंदे, दौर ए नाकामी के बाद ही, कामयाबी का तूफान आता है।। read more >>
पतझड़ के बाद बहार आता है, रात के बाद दिन आता है। नाकामयाबी से परेशान ना हो बंदे, दौर ए नाकामी के बाद ही, कामयाबी का तूफान आता है।। read more >>
पतझड़ के बाद बहार आता है, रात के बाद दिन आता है। नाकामयाबी से परेशान ना हो बंदे, दौर ए नाकामी के बाद ही, कामयाबी का तूफान आता है।। read more >>
जब आया तू इस दुनियां मे ना अपना था ना गैर कोई। बंधकर फिर इस मोह माया मे तब चेतना कभी फिर सोई नहीं । तिनका -तिनका फिर बना घोंसला read more >>
जब आया तू इस दुनियां मे ना अपना था ना गैर कोई। बंधकर फिर इस मोह माया मे तब चेतना कभी फिर सोई नहीं । तिनका -तिनका फिर बना घोंसला read more >>
मत दुखाओ दिल किसी का, एक दिन हिसाब होगा। बेशक तुम्हारे हाथों में, आज किसी का हिजाब होगा। आज तुम ताकतवर हो, बेशक तुम्हारा यहां निजाम � read more >>
कब तक आजमाएगा हमें यह सन्ग दिल जमाना, हमें आता है इसे कैसे है झुकाना। अभी बढ़ाना है हमें अपने मेहनत का पैमाना, बेशक इसके लिए क्यों ना प� read more >>
दो ज़िलों की कटती सीमा पर जुड़ते दो गांव संग सड़क सड़क। दो बसें चलती यहाँ रोज़ खिड़की संग खड़क खड़क। इसी खड़क से थोड़ा दूर , है ए� read more >>
मिज़ाज था तल्ख़ पर उससे आहिस्ता कहना पड़ा मैं था मुज़फ़्फ़र मगर ख़ुद को सिकस्ता कहना पड़ा मैंने किया था दावा ताउम्र साथ रहने का इ� read more >>
सर्द हवाओं के नाम सर्द हवाएँ जब चलती हैं, तो सिर्फ़ जिस्म नहीं काँपता— यादें भी सिहर उठती हैं। बढ़ती ठंड धीरे-धीरे वक़्त की रफ़्तार � read more >>
अब ये बात कहने की नहीं लगती वो बेवफ़ा है मगर हमें नहीं लगती उसके साथ की है छाँव इस क़दर कोई गर्म हवा भी अब नहीं लगती उस्ताद अव्वल थे भ� read more >>
ख्वाब के पार : हक़ीक़त (भाग – 1) विकल्प अभी स्कूल में पढ़ता है। उसे पढ़ाई से कोई परहेज़ नहीं, पर उसकी रुचि का केंद्र एक ही विषय है— हिन्द� read more >>
भीम नाम का कोई भी पुरुष महान् नहीं हो सकता । जब तक वह स्त्री के प्रति उदार, भेदभाव से रहित, शोषण से मुक्ति प्रदान न करें । छुआछुत से रहित read more >>
भीम नाम का कोई भी पुरुष महान् नहीं हो सकता । जब तक वह स्त्री के प्रति उदार, भेदभाव से रहित, शोषण से मुक्ति प्रदान न करें । छुआछुत से रहित read more >>
जादूगरी का अनोखा सफ़र लेखक: विजय शर्मा Erry कहा जाता है कि हर इंसान के जीवन में एक ऐसा मोड़ आता है, जहाँ उसे लगता है कि अगर थोड़ा-सा जादू मि� read more >>
पहली मोहब्बत तुम्हारा करियर होना चाहिए, जो हर हाल में तुम्हारा साथ निभाए। दुनिया जब शक करे तुम्हारी काबिलियत पर, वो तुम्हें खुद पर यक read more >>
अब तक ज़ेहन-ओ-दिल में यही पैकार रहा है जला है जो घर, उसमें कोई ग़द्दार रहा है वो जो कहते थे ये ज़मीं माँ है हमारी शायद वही इस देश का गु� read more >>
आपसे पहले जन्मी मैं, और आपको पाला-पोसा। जब बढ़ रहा था मरूस्थल, तो मैंने ही उसे रोका। आज मैं छोटी हो गई, और तुम हो गए बड़े !! आंधियों को अप� read more >>
सुमन अपने भाई संतोष को लेकर बहुत चिंतित रहने लगी थी। संतोष आज पूरे पैंतीस साल का हो गया था पर कोई रिश्तेदार लड़की देने के लिए हाँ नहीं कर read more >>
हार को अपनी करो स्वीकार, हार का ना करो कभी तिरस्कार। हार ही तो जीत की कुंजी है, हार ही जीत की पहली सीढ़ी है। जब दिल से आए यह पुकार, हार � read more >>
यही तो गुमान है मुझे कि, मैं सबका पेट पालता हूं। मगर खुद का नहीं, क्योंकि मैं किसान हूं। घूटन में पलता, कर्ज से मरता, भूखा और लाचार। हर � read more >>
यही तो गुमान है मुझे कि, मैं सबका पेट पालता हूं। मगर खुद का नहीं, क्योंकि मैं किसान हूं। घूटन में पलता, कर्ज से मरता, भूखा और लाचार। हर � read more >>
द्वारांगन समग्र पुकार का ! संबोधन वाणी का यही। चतुर्दिक पूर्णता से ओत-प्रोत, समस्त आशय का आश्रय यही। चिंतन की अथाह गहराई का, कुल माप � read more >>
कड़वे समय में भी अगर बोली में शहद घुल जाए, तो टूटे दिलों के शहर में उम्मीद का घर बन जाए। सबके हिस्से का सूरज है, सबकी अपनी-अपनी छाया, जो read more >>
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