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यह है हिंदुस्तान हमारा केसरिया सफेद हरा रंग, आन बान और शान हमारी। तीन रंग में रंगा तिरंगा, अशोक चक्र पहचान हमारी। हिमालय सा मुकुट हम read more >>
अपनों में ही गिराने की आज़माइश है, यह जानकर सँभलना चाहिए था। भाग कर आया है जहाँ से, उसे तो ठहर जाना चाहिए था। राह में हौसला-शिकन हों read more >>
आज तिरंगा सिर्फ लहराया नहीं, आज उसने हमसे वादा लिया है— कि हम अपने सपनों से बड़ा, अपने देश के लिए बनेंगे। ये गणतंत्र कोई तोहफ़ा नहीं, � read more >>
गुनगुनाओगे तो एक तराना हूं मैं, कोई गुजरा हुआ जमाना हूं मैं, भूल जाओगे तो बस एक फसाना हूं मैं।। read more >>
म्हारै मां बणावती ठाठीयो, छोटो, बड़ो अर भौत बड़ो। घर रौ सामान संभाळतो, ब्याव-शादी में मिठाई भी। भांत-भांत रा मांडणा अर, हिरमिच सूं रं� read more >>
अड़वौ खेत री फसल रो रुखाळो, अर सुख-दुख रौ भाईलो। फगत डांगर ही नीं घेरै बो, टुटती हिम्मत न पाछी मोड़ै। ईं बात रो अहसास करावै, कै, तूं ऐकल� read more >>
हम सब यात्री हैं एक ही राह के, नाम अलग हैं, मंज़िल एक, कोई तेज़ चलता, कोई रुकता है, पर समय सबका साथी एक। कोई सिखाता, कोई सीखता है, कभी जीवन read more >>
Kya likhu kitab ke panno par, har panne palta to paltata hii reh gya , bevajah kii es khamosi ko yu hii baya kar gya read more >>
अंटार्कटिका का वो अकेला पेंगुइन। जो सोचता भी है, समझता भी है। और फिर मुड़ जाता है एक लंबी, अथाह बर्फ की यात्रा पर__ अपने ही भीतर के पेंग� read more >>
क्या लिखू ! ऐ जिन्दगी तुझ पर तू हुनर नया सिखाती है, बेवजह की इस खामोशी को तू हर लम्हा अजमाती है read more >>
जंगल का राजा भी बन जाता है तमाशा यहाँ, जब अपनी चाल छोड़ दे, दुनिया की भाषा यहाँ। पिंजरे सोने के हों तब भी, घुटती है हर साँस यहाँ, आज़ादी � read more >>
दुनिया ने मुझसे पूछा, तूने क्या कमाया है, मैंने कहा, मेरे दिल ने सुकून पाया है। सोने की चाह में जब चैन को भुलाया है, हर रात ने मुझे मेरे � read more >>
यू लिखूं क्या लिखूं, जमाना लिखू कि अफसाना लिखूँ ,वस यू ही लिखता रहूँ , और जमाना लिख पाऊ ।। read more >>
आज की सुबह दिनेश के लिए नासूर बनकर उगी थी। वह अब भी अपने बिस्तर पर लेटा था। आँखें खुली थीं, पर उनमें उठने का कोई इरादा नहीं था— मानो रात � read more >>
देश के विकास में आपने बहुत योगदान दिया है। मैं खुद उस शहर से हूं जो आपका संसदीय क्षेत्र हुआ करता है‌। आपका नारा सबका साथ, सबका विकास मुझ read more >>
दैनिक काव्य सृजन दिन- बुधवार दिनांक 21 -1 _2026 शीर्षक ----यादें ही यादें जब शाम ढले मेरे घर पर यादों की दस्तक होती है मन फिर बेचैन होकर न जा� read more >>
मतला: वक़्त के आईने में मेरा सच नज़र आता है, जो मैं बनकर चलता हूँ, वही रूप बन जाता है। हर लम्हा सवाल बनकर रूह से टकराता है, मेरी खामोशी क� read more >>
यू रुलाए ! यू हसाए वस गुजारिश यही है , तू हर पल अजमाए।। read more >>
खामोशी के मंजर मे फरियाद एक आई है , हमे तराशा था जिसको, मुद्दत बनकर वही सिद्दत आई है ।। read more >>
बापू नाम नहीं व्यक्तित्व है, एक कालजयी अस्तित्व है। नव भारत के निर्माता वो, 'नव युग' के प्रणेता हैं वो। 'सत्य-अहिंसा' दीप जलाया, अपरिग्� read more >>
वक्त का क्या भरोसा कब कौन बदल जाए...??🥀 जिस पर आज भरोसा किया कल वही धोखा दे जाए...!!💔 धन्यवाद 🙏🏻 read more >>
गम के मजार मे लगे मेले है, खुदा जाने यहां कितने फरियादी अकेले है।। read more >>
मौत तो यूं ही बदनाम है ..!! रुलाती तो जीते जी हमें जिंदगी है...!! धन्यवाद🙏🏻 read more >>
दिनांक __30 /1 /2026 काव्य --- जब जब फूल खिले बसंत ऋतु के आने पर इन रंग बिरंगे फूलों ने किया है क्या? खूब श्रंगार ! मत तोड़ो? इन फूलों को इनमें छु read more >>
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