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उभरते हैं सीरत के दाग, सब सूरत पर। पैतरे लाख आजमाएं, कुछ बदल बदल। दर्पण माफिक झलकता रूप, है शक्ल-शक्ल। गिड़गिड़ाता दिखता है झूठ, निज जर� read more >>
फिर भी अन्धेरे में था ना दिन का पता था ना रात का पता था एक तेरा ही सहारा था / जिस दिन में अकेला था उस दिन तेरे गाँव में मेला था दिन रात क read more >>
जाग रात के जुगनू चोर टिम - टिमाना अब छोड़ आ चले अब पश्चिम की और , देख बादलो का मचा हे सोर , चाँदनी का हे धरा पर ज़ोर जाग रात के जुगनू चोर / न read more >>
दो आते बच्चे सुबह मोहिनी मुस्कान किरणों में वह कहते और गाते देना माई एक रोटी / फटे कपड़ो वाले नंगे बदन वाले दो नन्हें बच्चे, वह कहते � read more >>
प्रिय दोस्त पर्दा ही इस तरह लगाया तुमने चेहरे पे में रह गया असमर्थ तुम्हें पहचानने में/ तुमने देखा मेने देखा फिर भी रह गया में अंजान read more >>
वो तूफानों में पलते जा रहे हैं , वो आग पर भी चलते जा रहें हैं । खुदा भी नज़र अंदाज कर नही सकता , इन दियालो को ! जो दूसरों को रोशन करने के लि� read more >>
बैठा बारव्हीं सीढ़ी पर , भूला अपने आप को था | ना था साथ किसी का , बस दर्द का साथ था | मै बैठा था , जिस सीढ़ी पर | वो इस सफर का , आखिरी पायदान थ read more >>
आज उदासी से भरा बाग में बैठा था ,पता नहीं क्या मन में था ? ना किसी की याद थी ,ना कोई यादों में । ना कोई बात थी , ना मै किसी के वादों में ।। म read more >>
चल मुसाफ़िर तुझे दूर जाना है ! रात की गहराइयों में खोकर , ना जाने किस किस सपने को अपना बनाना है । अल्फाजों की रंगत से न जाने और कितने पन्� read more >>
लड़ते लड़ते थक सा गया हूं । शायद हार से डर गया हूं ।। मुस्करा के गम दफनाते दफनाते थक गया हूं। शायद मुस्किलो से डर गया हूं ।। चलते चल� read more >>
कभी वक्त था तो वक्त ना था ,डरते थे कहने से । मुस्किल में होते वो , तब डरते थे उनकी मुस्किल सहने से ।। वो रोज अदब से सुबह सर नवाते थे , क्या read more >>
इश्क का नज़राना कवि से नही कविता से प्यार कीजिए । मैने तो कर दिया आप भी इंतजार खत्म कर , इश्क ए इज़हार कीजिए ।। रचनाकार पर नही रचना पर � read more >>
अगर तू खुद को इश्क की नदी समझती है ! तो भूल न कर तेरे सामने समंदर खड़ा है !!!! ...sVs... read more >>
कविता-मन की मार बन अभिशाप जगत में बेटी मैं छिप कर क्यों जीवन जीती किसे सुनाऊं कौन सुनेगा किससे दिल की बात कहूं मैं? read more >>
ऐ मानव तुमसे विनती है मेरा मत संहार करो । इस मोक्षदायिनी मां पर बस ! इतना उपकार करो । मेरी कलकल -छलछल धारा तुमको संगीत सुनाती है । पी read more >>
जिंदगी का सफर यूं ही चलता रहता है, कभी खुशी कभी गम का मेला लगा ही रहता है, कभी उजाला कभी अंधेरा लगा ही रहता है। read more >>
खेला कल जिस माटी पर लहू से अपने उसे रोशन करने आया है। आंखो का बन मोती चमकने आया है। 'शूरवीर' है! वीरों के भांति आया है। वतन पर मर-मिटने � read more >>
घर की कुछ/सारी , जिम्मेदारियों को संभालता , करता सारी व्यवस्था जीवन निर्वाह का ...! चाहे वो फकीरा हो या हो वो लखपतिया ...! चौके के एक कोने � read more >>
जब जिन्दगी के सफर से परेशान हो जाओ तो थोङा रो लेना दिल का दर्द कुछ कम हो जाएगा read more >>
100 गुनाहो से बचकर इक तेरी आशिकी पाई है रब की मै हूँ सुक्रगुजार, मेरे ही जेसा मेरी सेहभागी बनाई है read more >>
भोला और सेठ किसी गांव में भोला नाम का एक लड़का रहता था। घर में वह और उसकी मां केवल दो प्राणी थे। पिता, उसके बचपन में ही चल बसे थे। भोला ग read more >>
समझदार हैं वो लोग जो भूले नहीं अपने वकार को! इस दौर में आसानी से भूल जाते हैं लोग अपने किरदार को इस दुनिया कि भीड़ में हमने घाटे का सौदा ह� read more >>
प्रकृति वर्णन (ऊषा ) नील गगन से उतर आयी एक परी। रत्न जड़ित अलंकृत परिधान हरी। नील नयन लोचन दृग अभिरामा। शश्य श्यामल हरित पल् read more >>
हिमालय महिमा गवाक्ष खोल विराट हिमालय के कर दर्शन हिमाच्छादित उत्तुंग चोटी छूने को है गगन। बाल उषा नन्ही अरूण read more >>
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