कुछ रास्ते, रिश्तों को कुचल गए।
कुछ मैं, कुछ मेरे दोस्त बदल गए।
गलियों वाले, सड़कों पर चक्कर काट रहे।
सूरे- पूरे बन गए, जो कभी पौने आठ रह� read more >>
मैं नहीं काठ की कोई पुतली
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मैं नहीं काठ की कोई पुतली,
ना सौप किसी गैर के हाथ मुझे ।
मोहे सात फेरो में बांधने से पहले बाब read more >>
दोस्त और दुश्मन
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महफिल में मिले सौ दोस्त तो मगर,
दुश्मन ना कोई एक ओ यारा तुम सा मिला ।
वो जो विरुद्ध खड़ा है अब तक मेरे read more >>
अन्त हुआ एक युग का
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अन्त हुआ एक युग का,
जैसे ही अनात्म हुई सुश्री लता।
रहे गयी बस यादों में हम सबके ।
गीतों में अमर हुई स्व read more >>
सफलता तो कभी कभी मेहनत न करने वालो को भी मिल जाता है,
यही तो भारत का दुर्भाग्य कहलाता है।
60% लाने वाले सरकारी दफ्तर में बैठे है,
90%लाने वा� read more >>
सच्ची है, नहीं तकिया- कलाम।
गुलामी, तुझे सलाम।
कोई धर्म का, कोई कर्म का, कोई शर्म का गुलाम है।
कोई आदत का, कोई मत का, कोई हरम का गुलाम है।
क read more >>
जो पहले ही कदमो में लडखडा जाये
वो चाल ही क्या ?
जो तेज भी दौडे और मंजिल तक न पहुँचे
वो रफ्तार ही क्या ?
जो चहरा देखकर मुँह फेर ले
वो प्यार read more >>