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इश्क
तमीज तो देखो मेरे इश्क की उसे पाने के लिए मैनें तावीज़ पहना है
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ख्याल
कविता-ख्याल ख्याल आता है क्षण भर के लिए न जाने क्यों रुकता नहीं पल भर के लिए भूलता नहीं भूल पाता नहीं हूं वह रिस्ता जो पहली बार पहल�
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मेरी नन्ही परी
ओ! मेरी लाड़ली ओ! मेरी नन्ही परी डरी थी मैं जब तु आई थी परी डरे थे तेरे बाबा भी तु जब आई थी परी ज़माने की गंदी निगाहों स
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भक्त नामदेव प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर....करण सिंह
भक्त नामदेव प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर....करण सिंह *कन्धे पर कपड़े का थान लादे और हाट-बाजार जाने की तैयारी करते हुए नामदेव जी से पत्�
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अब आगाज यहां
प्रकृति किलेबंदी नदी नहरो से वो सिंह द्वार है मैं यहीं का हूं नहीं शिखरो से है अभिनंदन करने दो शेर खड़े कोयल गाती स्वागत गीत और नृत�
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विकल्प
नहीं ज्ञान जिस विषय का, उस संदर्भ में कुछ कहना । विकल्प नहीं कोई, खामोशी से बेहतर है ।। भुलाकर गमो के पल को, सीखो आज में तुम जीना । जिं�
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मत छूओ छाया को
मत छूओ छाया को अब बिखर जाने दो/ इन काले बादलो को आसमान में उड़ जाने दो, मत छूओ छाया को अब बिखर जाने दो/ तिन - तिन बिखरती इन गर्मियों को आ�
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और तुम कितने अच्छे लगते हो
ये रातें तुम्हारा ही ख्याल बढ़ाती हे ख्याल इस तरह बढ़ जाता हे हर मोसम में सिर्फ तुम्हारा ही चेहरा नजर आता हे, और तुम कितने अच्छे लगते ह�
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ढोंग
ढोंग बड़े मुझ ढोंगी में, स्वयं कर मैं देवी पूजा । और विरोध उनका मैं करता, जो करते मूर्तिपूजा ।। कलश स्थापना मैं घर में करता, करता विध�
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आगाज़
आइए बैठकर कुछ बात किया जाए' दिले कशमकश को समाप्त किया जाए! दूरियां नजदीकियां कुछ भी नहीं रहा' अब एक नई मंजिल तलाश किया जाए! हर कि�
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परिस्थितियाँ अभी अनुकूल नहीं
परिस्थितियॉ अभी अनुकूल नहीं, खामोश लबों को रहने दो । वो जो उड़ रहे सिध आसमॉ के, अभी उन्हें खुले आसमान में उड़ने दो ।। सत्य तो आख़िर सत
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दीपदान
दिव्य ज्ञान रूपी हो यह प्रकाश, अंधकार मुक्त जग ये सारा हो । हो दीपदान का प्रचलन , जिससे रौशन जहॉ ये सारा हो ।। ना हो ऊँच नीच का भेदभाव, �
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दीपदान
दिव्य ज्ञान रूपी हो यह प्रकाश, अंधकार मुक्त जग ये सारा हो । हो दीपदान का प्रचलन , जिससे रौशन जहॉ ये सारा हो ।। ना हो ऊँच नीच का भेदभाव, �
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महफिल में कमी ना थी
महफिल में कमी ना थी, दोस्तों की लेकिन । चंद दुश्मनों से जाकर, कुछ दोस्त मिल चुके थे ।। वे जो नजरे मिलाने से भी, कभी कतराते थे हमसे । सा
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Sher
खुदासे कोई माँगने वाला चाहीये, दिलमे जगह हे रहनेवाला चाहीये, हर किसी की आँखो पर पैसा ही है, हम भी खुबसुरत हे देखने वाला चाहीये।
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तूने मेरा दिल नही तोड़ा
तूने मेरा दिल नहीं तोड़ा, अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारी है। तूने तो दिखा ली अपनी नफरत, जानू अब हमारी बारी है।
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कोई रोए बिना न रह सकेगा देख मेरी हालत
हमारा हम्ही से रिश्ता गहरा है, हमारा हम्ही पर शख्त पहरा है, कोई रोए बिना न रह सकेगा देख मेरी हालत जख्म मेरे दिल का इतना गहरा है
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मन चाहे चिड़िया हो जाऊं
मन चाहे चिड़िया हो जाऊं दूर दूर नदियों में जाऊं शीतल अमृत में चोंच डुबोऊ स्वर्ण रेत पर ठुमक ठुमक इतराऊ मन चाहे चिड़िया हो जाऊं। दूर �
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सब अपने अंदर ही नजर आता है
अंदर का सबेरा ,जब जाग जाता है बाहर का दिन भी, तब रात नजर आता है कहीं कुछ भी नही है, इस भीड़ भरी दुनिया में हम जागें, तो सब अपने ही अंदर नजर आ
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तू किताब होती तो
तू किताब होती तो पढ़ के जान लेता अक्षरों के लिखाबटों से पहचान लेता कोहचान से अंशार या अंशार से कोहचान बना लेता मैं लकीरें पढ़ पता न�
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सही चुनाव
दोस्तो जागो और सुनो नया इतिहास बनाने का । सारे दल के हर पहलू हर भाव को अजमाना है किसने तुमको दिया कितना इसको अब पहचानना है सत्य राह पर �
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मैं जिन्दगी के मसले हल
मैं जिन्दगी के कुछ मसले हल करना चाहता हूँ। मैं जिन्दगी के बीते हुये पल फिर से जीना चाहता हूँ। फासले कितने भी हो मैं उन्हे दूर करना च�
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मां का पल्लू
पल्लू से मां, पसीने को पोंछती। गर्म भाप पल्लू से, जख़मी अक्षि को सेंकती। मां पल्लू से, मुंह करती साफ़। गीला कर सिर पर रखती, जब बढ़ जाता त
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* पक्षी *
* पक्षी * पक्षी तुम कितने अच्छे हो ऊंचाइयों को छू सकते हो। ऊंचाइयों पर उड़कर पक्षी गर्व नहीं तुम करते हो ।। राग द्वेष नहीं मन में तेर�
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